उत्तराखंड

क्यूआर कोड बताएगा कुंभ क्षेत्र का इतिहास, सुविधाओं से लेकर धार्मिक महत्व तक मिलेगी पूरी जानकारी

साइनेज स्कैन करते ही मोबाइल पर खुलेगी जानकारी, समर्पित ऐप से एक क्लिक में मिलेंगी मेला क्षेत्र की व्यवस्थाएं; तैयारियों को समयबद्ध पूरा करने के निर्देश

देहरादून। हरिद्वार कुंभ-2027 में श्रद्धालुओं को किसी स्थान, धार्मिक स्थल या सुविधा की जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। मेला क्षेत्र में लगाए जाने वाले साइनेज पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। श्रद्धालु मोबाइल से कोड स्कैन करते ही संबंधित स्थल का इतिहास, धार्मिक महत्व, लोकेशन और जरूरी जानकारियां हासिल कर सकेंगे। यानी कुंभ में आस्था के साथ डिजिटल सुविधा भी श्रद्धालुओं के अनुभव का हिस्सा बनेगी।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कुंभ की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र की विभिन्न लोकेशन, सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराने के लिए समर्पित मोबाइल एप भी तैयार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को जानकारी के लिए अलग-अलग स्थानों पर निर्भरता से मुक्त करना और कुंभ प्रबंधन को अधिक तकनीक आधारित बनाना है।

डिजिटल सुविधा के साथ जमीन पर भी पुख्ता तैयारी

मुख्य सचिव ने निर्माण कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के साथ समानांतर रूप से होने वाले कार्यों को साथ-साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्याप्त पार्किंग, सरकारी भूमि पर आवश्यक सुविधाओं के निर्माण और नहरबंदी अवधि का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया। सिंचाई और पेयजल से जुड़े कार्यों की लगातार निगरानी तथा वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था समय से पूरी करने को कहा।

हरिद्वार कुंभ के लिए सड़क, पुल, घाट, पेयजल, स्वास्थ्य, यातायात और पार्किंग जैसी स्थायी सुविधाओं को मजबूत करने पर पहले से काम चल रहा है। फरवरी 2026 में राज्य सरकार ने 234.55 करोड़ रुपये की लागत से 34 प्रमुख अवस्थापना कार्यों का शिलान्यास किया था।

मानव संसाधन की भी अभी से तैयारी

कुंभ जैसे विशाल आयोजन में तकनीक और निर्माण के साथ पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती होगी। मुख्य सचिव ने जनगणना और निर्वाचन कार्यों के कारण कुंभ के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित न हो, इसके लिए अभी से मानव संसाधन की कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। अस्थायी पुलों का निर्माण नवंबर तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने मेलाधिकारी को नियमित स्थलीय निरीक्षण कर समस्याओं का तत्काल समाधान कराने और सभी विभागों को आपसी समन्वय से समयबद्ध कार्य पूरा करने को कहा। इससे साफ है कि आगामी कुंभ की तैयारियों में सरकार का जोर केवल भव्य आयोजन पर नहीं, बल्कि श्रद्धालु सुविधा, डिजिटल सूचना तंत्र, यातायात, पार्किंग, पेयजल, सुरक्षा और स्थायी अवस्थापना को एकीकृत व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर है।

कुंभ-2027 के लिए सरकार पहले ही तैयारियों को समयबद्ध पूरा करने पर जोर दे चुकी है। ऐसे में क्यूआर कोड और प्रस्तावित मोबाइल एप जैसी पहल श्रद्धालुओं को सूचना उपलब्ध कराने के साथ मेले को अधिक व्यवस्थित और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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