39,815 ग्रामीण परिवारों को मिली पक्की छत, आवास के साथ सुविधाओं का भी विस्तार
पीएम आवास योजना-ग्रामीण ने पकड़ी रफ्तार, घर के साथ शौचालय, बिजली, पानी और गैस जैसी सुविधाओं से जुड़ रहे जरूरतमंद परिवार
देहरादून। उत्तराखंड के गांवों में जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्का घर अब केवल आवास नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की बुनियाद बन रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत वर्ष 2022 से अब तक प्रदेश में 39,815 परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जा चुके हैं। पहाड़ी से लेकर मैदानी जिलों तक योजना की पहुंच ने उन परिवारों को स्थायी छत दी है, जो लंबे समय से कच्चे या जर्जर मकानों में रहने को मजबूर थे। उत्तराखंड में पीएमएवाई-जी के तहत पहाड़ी राज्य के लिए प्रति आवास 1.30 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है।
आंकड़ों के अनुसार ऊधमसिंह नगर में सर्वाधिक 4,882 आवास बने हैं। हरिद्वार में 4,493 और रुद्रप्रयाग में 4,032 परिवारों को पक्का घर मिला है। इसके अलावा चमोली में 3,900, पिथौरागढ़ में 3,386, पौड़ी में 3,195 और उत्तरकाशी में 3,057 आवास निर्मित हुए हैं। यानी योजना का दायरा केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्गम पर्वतीय जिलों में भी बड़ी संख्या में परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं।
घर के साथ मूलभूत सुविधाओं का सुरक्षा कवच
पीएमएवाई-जी की खासियत यह है कि पक्के आवास को दूसरी सरकारी योजनाओं से जोड़कर परिवारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। योजना के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की सहायता और मनरेगा के तहत 95 मानव दिवस की अकुशल मजदूरी का प्रावधान है। पेयजल, बिजली और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाओं को भी संबंधित योजनाओं के साथ जोड़ा जाता है। सभी भुगतान डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में किए जाने का प्रावधान है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2022-23 से किचन सामग्री और बर्तन खरीदने के लिए दी जाने वाली अतिरिक्त सहायता भी पांच हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये की है। इसका मकसद आवास निर्माण के बाद परिवार की जरूरतों को भी कुछ हद तक पूरा करना है।
पक्की छत से आगे, बदल रही ग्रामीण जिंदगी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार अधिक से अधिक पात्र परिवारों को आवास योजना का लाभ दिलाने पर जोर दे रहे हैं। राज्य के 2025-26 के बजट में भी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए 207.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।
दरअसल, पहाड़ों में पक्का घर केवल सिर ढकने की जगह नहीं, बल्कि गांव में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार है। जर्जर मकानों से मुक्ति, शौचालय, बिजली, पानी और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाओं का एक साथ मिलना ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में व्यापक बदलाव ला सकता है। यही कारण है कि पीएमएवाई-जी को केवल आवास निर्माण की योजना के बजाय ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा और जीवन गुणवत्ता से जुड़ी पहल के रूप में देखना अधिक महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। योजना का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।



