दुर्गम पहाड़ में सुरक्षित मातृत्व की पहल, प्रसव से पहले अस्पताल के पास ठहरेंगी गर्भवती महिलाएं
बर्थ वेटिंग होम में मिलेगी ठहरने की सुविधा, आपात स्थिति में हेली एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचेंगी गर्भवती महिलाएं; सीएम धामी बोले- मातृ-शिशु मृत्यु दर घटाना सरकार की प्राथमिकता

खटीमा। पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान अस्पताल पहुंचने में होने वाली परेशानी अब उनके और बच्चे के जीवन पर भारी न पड़े, इसके लिए सरकार बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था करने जा रही है। प्रसव की संभावित तिथि से पहले गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों के नजदीक ठहराया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके। आपात स्थिति में हेली एंबुलेंस के जरिये अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खटीमा के आंगनबाड़ी केंद्र गोसीकुआ भुड़ाई में आयोजित ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क व परिवहन की सीमित सुविधा के कारण गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती है। बर्थ वेटिंग होम से ऐसी महिलाओं को प्रसव से पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों के करीब लाया जा सकेगा, जिससे आपात स्थिति में उपचार में देरी का जोखिम कम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना सरकार की प्राथमिकता है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना और महालक्ष्मी किट जैसी योजनाओं से भी महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म निभाई और 10 महिलाओं को पौष्टिक आहार किट तथा 10 लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट वितरित की। पांच बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाली आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण सामग्री वितरण के केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की पहली पाठशाला हैं। सरकार इन सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए काम कर रही है।



