उत्तराखंडकृषि उद्यान

दुनियाभर के बाजार में पहुंचेगा उत्तराखंड का सेब, ब्रांडिंग पर सरकार का जोर

उत्पादन से आगे बढ़कर ब्रांड वैल्यू बनाने की तैयारी, एफपीओ को मजबूत कर किसानों को बेहतर बाजार और दाम दिलाने पर फोकस

देहरादून। उत्तराखंड का सेब अब केवल पहाड़ों की पहचान नहीं, बल्कि देश-दुनिया के बाजार में अपनी अलग ब्रांड पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। राज्य सरकार ने सेब समेत कृषि और बागवानी उत्पादों की ब्रांडिंग, बेहतर मार्केटिंग, गुणवत्ता और बाजार उपलब्धता को प्राथमिकता देने के संकेत दिए हैं। सरकार का जोर उत्पादन बढ़ाने के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिससे बागवानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिले और उत्तराखंड के सेब की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचे।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को नाबार्ड के देहरादून स्थित शाखा कार्यालय में सेब महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कृषि एवं बागवानी उत्पादों की खरीद, विपणन और ब्रांडिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सेब को केवल खेत और बाग तक सीमित रखने के बजाय उसकी ब्रांड वैल्यू तैयार करनी होगी।

एफपीओ बनेंगे बाजार से जोड़ने की कड़ी

सेब महोत्सव में विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) ने सेब की अलग-अलग प्रजातियों के साथ कीवी, सब्जियों और अन्य उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। मुख्य सचिव ने किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों से उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार की उपलब्धता और कारोबार में आ रही चुनौतियों की जानकारी ली।

उन्होंने कहा कि एफपीओ को मजबूत, आत्मनिर्भर और टिकाऊ संस्थाओं के रूप में विकसित करना जरूरी है। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता विकास और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाए, ताकि किसान बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय संगठित होकर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकें।

गुणवत्ता से लेकर पैकेजिंग और ट्रेसेबिलिटी तक

सरकार की रणनीति में केवल ब्रांडिंग ही नहीं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार के भरोसे को मजबूत करना भी शामिल है। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए शीत भंडारण सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है। वहीं उत्पाद कहां और किस किसान से आया, इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

जैविक उत्पादों के प्रमाणन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि उत्तराखंड के उत्पादों को प्रीमियम बाजार मिल सके। नाबार्ड और राज्य सरकार की योजनाओं में बेहतर समन्वय के जरिये एफपीओ को वित्तीय और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर भी जोर है।

दरअसल, पहाड़ी कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल उत्पादन नहीं, बल्कि उत्पाद को बाजार और किसान को उचित दाम से जोड़ना है। यदि सरकार की यह पहल उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार की पूरी श्रृंखला को एक साथ मजबूत करती है तो उत्तराखंड के सेब के साथ कीवी और अन्य स्थानीय उत्पादों के लिए भी बड़े बाजार के दरवाजे खुल सकते हैं।

यही पहल पर्वतीय किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी को टिकाऊ रोजगार का आधार बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस अवसर पर सचिव डॉ. एसएन पाण्डेय, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव और महाप्रबंधक शशि कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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