देहरादून। उत्तराखंड में भीषण गर्मी और लंबे समय से बनी सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहे लोगों के लिए आखिरकार राहत की बड़ी खबर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून का लंबा इंतजार मंगलवार को समाप्त हो गया। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने राज्य में मानसून के विधिवत प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
इस वर्ष मानसून अपनी सामान्य तिथि की तुलना में करीब सात दिन की देरी से देवभूमि पहुंचा है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि अब मानसून के सक्रिय होने के साथ ही राज्य के अधिकांश जिलों में झमाझम बारिश का दौर शुरू होगा, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी।
क्यों हुई मानसून के आने में देरी?
मौसम विभाग के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में मानसून एक जून के आसपास केरल के तट पर दस्तक देता है और वहां से लगभग 20 दिनों का सफर तय कर उत्तराखंड पहुंच जाता है। लेकिन इस बार इसकी चाल शुरुआत से ही सुस्त रही।
केरल आगमन में देरी: इस बार मानसून तीन दिन की देरी से यानी 4 जून को केरल पहुंचा।
अल नीनो का प्रभाव: प्रशांत महासागर में बनी ‘अल नीनो’ जैसी विपरीत परिस्थितियों के कारण मानसूनी हवाओं की गति और वितरण प्रभावित हुआ।
मध्य भारत में थमी रफ्तार: जून के मध्य में मानसून कुछ समय के लिए कमजोर पड़ गया था, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ने में इसे अतिरिक्त समय लगा।
दोहरी नमी से मिली ताकत: राहत की बात यह रही कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से पर्याप्त नमी मिलने के बाद मानसून ने दोबारा रफ्तार पकड़ी और आखिरकार 30 जून को उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर लिया।
कृषि को मिलेगी संजीवनी, जल स्रोतों में होगा सुधार
मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी, दोनों ही क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है। मानसून की इस दस्तक से न केवल तपती गर्मी से राहत मिलेगी, बल्कि सूखते जा रहे पारंपरिक जल स्रोतों (नौले-धारों) को नया जीवन मिलेगा। रोपाई और बुवाई के इंतजार में बैठे किसानों और कृषि गतिविधियों को भारी गति मिलेगी। जंगलों की आग (वनाग्नि) की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लग सकेगी।
मौसम विभाग की चेतावनी: “मानसून के आगमन के साथ ही कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की संवेदनशीलता को देखते हुए आम जनता और तीर्थयात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने तथा मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।”
राज्य में पिछले 13 वर्षों में मानसून के आगमन
यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उत्तराखंड में मानसून के आगमन की तारीखों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पिछले 13 वर्षों का पूरा लेखा-जोखा इस प्रकार है:
वर्ष मानसून, आगमन की तिथि
2014, 1 जुलाई
2015, 24 जून
2016, 21 जून
2017, 1 जुलाई
2018, 30 जून
2019, 24 जून
2020, 23 जून
2021, 13 जून
2022, 30 जून
2023, 23 जून
2024, 27 जून
2025, 20 जून
2026, 30 जून
आंकड़ों से स्पष्ट है कि साल 2021 में मानसून ने सबसे पहले (13 जून) दस्तक दी थी, जबकि 2014, 2017 और इस बार 2026 में इसने सबसे ज्यादा तरसाया है।


