हर घर लहराएगा दून का हैंडमेड तिरंगा
सहसपुर की महिलाओं ने तैयार किए पांच हजार से अधिक राष्ट्रीय ध्वज, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा हुनर और रोजगार

देहरादून। इस स्वतंत्रता दिवस दून के घर-घर में जो तिरंगा शान से लहराएगा, उसमें सहसपुर की ग्रामीण महिलाओं के हुनर और मेहनत की खुशबू भी होगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहे सूती कपड़े के हैंडमेड तिरंगे ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को स्थानीय रंग दे दिया है। शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट में महिलाएं अब तक पांच हजार से अधिक तिरंगे तैयार कर चुकी हैं। खास बात यह है कि राष्ट्रीय ध्वज बनाने का यह काम महिलाओं के लिए रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता और सम्मान का जरिया भी बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को सहसपुर की महिलाएं अपने हुनर से धरातल पर उतार रही हैं। ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना (रीप) और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से स्थापित सिलाई यूनिट में आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिलाएं बड़े स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं।
15 अगस्त और 26 जनवरी में बढ़ जाती है मांग
आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के लिए बड़ी संख्या में तिरंगे तैयार करता है। स्कूल-कॉलेज, सरकारी विभाग, सामाजिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और स्थानीय बाजार से इन हैंडमेड तिरंगों की मांग रहती है। इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के कारण मांग और बढ़ गई है।
चांदनी स्वयं सहायता समूह की सदस्य कविता बताती हैं कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के आसपास राष्ट्रीय ध्वज के लिए बड़ी संख्या में आर्डर मिलते हैं। सरकारी विभागों, ब्लाक कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय बाजार से मिलने वाले काम ने समूह की महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोले हैं।
तिरंगा बना महिलाओं की कमाई का जरिया
शंकरपुर की सिलाई यूनिट का संचालन कर रहीं जयमाला के अनुसार घर के नजदीक काम मिलने से महिलाओं को परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। विभागीय सहयोग से बड़े आर्डर मिलने के कारण महिलाओं को अपने उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने का मंच भी मिला है।
बीते गणतंत्र दिवस पर तिरंगा निर्माण और बिक्री से समूह की महिलाओं ने करीब एक लाख रुपये की बचत अर्जित की थी। इससे महिलाओं में अपने हुनर को कारोबार में बदलने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
15 से 20 महिलाएं जुटी हैं तिरंगा बनाने में
रीप की जिला परियोजना प्रबंधक सोनम गुप्ता ने बताया कि परियोजना के तहत सहसपुर ब्लाक में सिलाई यूनिट स्थापित की गई है। आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं इसी यूनिट में राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं। वर्तमान में करीब 15 से 20 महिलाएं तिरंगा बनाने में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को देखते हुए महिलाओं से राष्ट्रीय ध्वज की खरीद भी की जा रही है।
प्रशासन और बाजार से मिल रही मांग
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रीप और एनआरएलएम के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने पसंदीदा क्षेत्रों में स्वरोजगार की दिशा में बेहतर कार्य कर रही हैं। स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए महिलाएं अलग-अलग आकार के तिरंगे तैयार कर रही हैं। जिला प्रशासन के साथ स्थानीय बाजार और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े लोग भी इन महिलाओं से तिरंगे खरीद रहे हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ उनके उत्पाद को बाजार भी मिल रहा है।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि रीप के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भागीदारी करने के साथ आय भी अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल स्वरोजगार स्थापित नहीं कर रहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्व में अपनी प्रतिभा और हुनर का परिचय भी दे रही हैं।
सहसपुर की इन महिलाओं के लिए तिरंगा सिर्फ कपड़े के तीन रंगों से बना राष्ट्रीय ध्वज नहीं है। यह उनके हुनर, मेहनत, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की पहचान भी बन चुका है। इस बार दून के घरों पर लहराने वाला तिरंगा देशभक्ति के साथ इन महिलाओं के सपनों को भी नई उड़ान देगा।


