
देहरादून। बर्फ की सफेद चादर ओढ़े हिमालय, कड़ाके की ठंड और दुर्गम पहाड़ियों के बीच अब नेलांग घाटी सर्दियों में भी पर्यटकों का स्वागत करेगी। उत्तरकाशी की सामरिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नेलांग घाटी पहली बार एक दिसंबर से शीतकालीन पर्यटन के लिए खोली जाएगी। गंगोत्री नेशनल पार्क के अंतर्गत आने वाली इस घाटी में विंटर टूरिज्म शुरू होने से पर्यटकों को हिमालय के अनछुए और बर्फीले प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। साथ ही दुर्लभ स्नो लेपर्ड के दीदार को पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बनाने की तैयारी है।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एवं प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल के अनुसार, घाटी को सर्दियों में खोलने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बर्फ से ढकी घाटी के प्राकृतिक परिदृश्य को पर्यटकों के सामने लाने के साथ स्नो लेपर्ड टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। स्थानीय युवाओं को वन्यजीव पर्यटन से जोड़ने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय लोगों को लद्दाख भेजा जा रहा है, जहां वे पर्यटन और वन्यजीव गतिविधियों का प्रशिक्षण लेकर लौटेंगे।
150 साल पुराना गर्तांग गली पुल भी बनेगा आकर्षण
भारत-तिब्बत के बीच कभी प्रमुख व्यापार मार्ग रही नेलांग घाटी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ इतिहास भी समेटे है। चट्टानों को काटकर बनाया गया करीब 150 वर्ष पुराना गर्तांग गली का लकड़ी का पुल यहां आने वाले पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहेगा।
वन्यजीव पर्यटन से पांच गुना तक बढ़ सकती है स्थानीय आय
वन विभाग के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु के अनुसार मैकिन्से के आकलन में वन्यजीव पर्यटन के लिए आने वाले पर्यटक सामान्य पर्यटकों की तुलना में पांच से छह गुना अधिक खर्च करते हैं। ऐसे में नेलांग में विंटर टूरिज्म से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, पर्यटन सहायक और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। विभाग का जोर प्राकृतिक आवास और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ सतत पर्यटन विकसित करने पर है।



