उत्तराखंड

गरुड़ गंगा और पश्चिमी नयार नदी का होगा कायाकल्प, 60 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी

देहरादून। उत्तराखंड में प्राकृतिक जलस्रोतों व नदियों को पुनर्जीवन देने की दिशा में सरकार गम्भीरता से कदम उठा रही है। सचिवालय में मुख्य सचिव आंनद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित ‘स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी’ की 5वीं हाई पावर्ड कमेटी  की बैठक में राज्य की दो प्रमुख नदियों बागेश्वर की गरुड़ गंगा और पौड़ी गढ़वाल की पश्चिमी नयार नदी के पुनर्जीवन व जल संवर्धन से जुड़ी बड़ी कार्ययोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं समेत राज्य में पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए कार्ययोजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है।

​मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग आपसी समन्वय  बनाकर तय समय-सीमा के भीतर चैक डैम, बराज और स्प्रिंग रिचार्ज का काम पूरा करें। साथ ही, नदी पुनर्जीवन के कार्यों को पूरी तरह वैज्ञानिक ढंग से संपन्न करने के लिए एक एसओपी तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

​गरुड़ गंगा और पश्चिमी नयार नदी के लिए महायोजना

​बैठक में जिला-स्तरीय कार्ययोजनाओं के विशेष प्रस्तुतीकरण के बाद इन दो बड़ी परियोजनाओं को तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति दी गई।

-​बागेश्वर की गरुड़ गंगा: इस नदी के पुनर्जीवन के लिए वन, लघु सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसे विभिन्न विभागों के समन्वय से ₹1,200.21 लाख (12 करोड़ रुपये से अधिक) की परियोजना को मंजूरी मिली है। इसमें ‘सारा’ का अनुदान ₹849.98 लाख होगा और इसके तहत नदी क्षेत्र में 1,291 चेक डैम बनाए जाएंगे।

-​पौड़ी गढ़वाल की पश्चिमी नयार: पश्चिमी नयार नदी के जल संवर्धन के लिए ₹4,797.97 लाख (लगभग 48 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम कार्ययोजना को तकनीकी स्वीकृति दी गई है। इसके वित्तीय प्लान पर पुनर्विचार करने के साथ ही ग्रामीण विकास, वन और बागवानी विभाग को मिलकर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

​’एक जनपद-एक नदी’ योजना के तहत 13 नदियों का पुनरुद्धार

​राज्य के सभी 13 जिलों में वर्षा आधारित नदियों को नया जीवन देने के लिए IIT रुड़की, FRI और NIH रुड़की जैसी शीर्ष वैज्ञानिक संस्थाओं की मदद ली जा रही है। वर्तमान में अल्मोड़ा की जटा गंगा, चमोली की चंद्रभागा, चंपावत की गौड़ी और पौड़ी की ह्यूनिल जैसी नदियों पर पुनरुद्धार का कार्य तेज गति से चल रहा है।

 ‘धारा नौला संवर्धन योजना’ से बचेंगे पारंपरिक जल मंदिर

​उत्तराखंड की सांस्कृतिक और पौराणिक जल धरोहर को सहेजने के लिए राज्य में ‘धारा नौला संवर्धन योजना’ को कड़ाई से लागू किया जा रहा है:

-​प्रथम चरण: पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व के 54 पारंपरिक जल स्रोतों (प्रत्येक जिले से 5) को पुनरुद्धार के लिए चिन्हित किया गया है।

-जनभागीदारी: स्थानीय लोगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए राज्य भर में अब तक 1,327 धारा-नौला संरक्षण समितियों का गठन किया जा चुका है।

​भूजल रिचार्ज और जल संग्रहण में बड़ी कामयाबी

​मुख्य सचिव ने ‘सारा’ को ग्राउंड वॉटर रिचार्ज के लिए जल्द ही एक ठोस पॉलिसी लाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में जल संरक्षण अभियानों के जो आंकड़े पेश किए गए, वे बेहद उत्साहजनक हैं:

-​रिचार्ज शाफ्ट: नैनीताल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिलों में कुल 256 रिचार्ज शाफ्ट/पिट बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से जून 2026 तक 205 का काम पूरा हो चुका है।

-​जल संचय: जल संरक्षण अभियानों के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2024-25 में 32.1 लाख क्यूबिक मीटर, वर्ष 2025-26 में 5.4 लाख क्यूबिक मीटर और वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 1.40 लाख क्यूबिक मीटर जल का संग्रहण किया जा चुका है।

​वित्तीय स्थिति और आगामी खाका

​बैठक में बताया गया कि SARRA के तहत उत्तरकाशी, नैनीताल और टिहरी जिलों में कुल 16 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि विभिन्न जनपदों में 86 परियोजनाएं वर्तमान में गतिमान हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘सारा’ ने कुल 154.12 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का बड़ा खाका तैयार किया है। मुख्य सचिव ने इन कार्य योजनाओं को कैम्पा के माध्यम से कन्वर्जेंस कर गति देने और IIT व NIH के अलावा अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों को भी इस मुहिम से जोड़ने के निर्देश दिए हैं।

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