अर्द्धकुंभ 2027: एआई रखेगा वन्यजीवों पर 24×7 नजर, हरिद्वार में लगेंगे 50 से अधिक स्मार्ट कैमरे
राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग के संवेदनशील इलाकों में बनेगा एआई आधारित सर्विलांस नेटवर्क, दिसंबर तक सिस्टम तैयार करने की तैयारी
हरिद्वार। अगले वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्द्धकुंभ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सर्विलांस सिस्टम स्थापित करने जा रहा है। इस तकनीक के जरिए राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में हाथी, गुलदार समेत अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी।
वन विभाग जल्द ही इस परियोजना का प्रस्ताव शासन को भेजेगा। विभाग का लक्ष्य दिसंबर 2026 के अंत तक पूरी व्यवस्था स्थापित कर संचालन शुरू करने का है, ताकि अर्द्धकुंभ से पहले निगरानी तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो सके। राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में भी इस योजना पर चर्चा हुई, जिसके बाद विभाग को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए।
ऐसे काम करेगा एआई सर्विलांस सिस्टम
योजना के तहत वन्यजीवों की आवाजाही वाले संवेदनशील स्थानों पर हाई-रिजोल्यूशन एआई कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे दिन-रात लगातार निगरानी करेंगे और जैसे ही किसी वन्यजीव की गतिविधि दर्ज होगी, उसकी सूचना तत्काल कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी।
राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग में बनाए जाने वाले कंट्रोल रूम से त्वरित प्रतिक्रिया दल (रैपिड रिस्पॉन्स टीम) को अलर्ट भेजा जाएगा। टीम मौके पर पहुंचकर वन्यजीव को आबादी या मेले के क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले सुरक्षित रूप से जंगल की ओर वापस भेजेगी।
इन क्षेत्रों में लगेंगे स्मार्ट कैमरे
योजना के तहत रोशनाबाद, श्यामपुर, चिड़ियापुर, रानीपुर, मोतीचूर समेत अन्य संवेदनशील स्थानों पर 50 से अधिक एआई कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा अर्द्धकुंभ क्षेत्र से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर भी निगरानी कैमरे लगाने की योजना है, क्योंकि यहां भी वन्यजीवों की आवाजाही होती रहती है।
शासन की मंजूरी का इंतजार
राज्य की मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल ने बताया कि शासन से मंजूरी मिलते ही हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उनका कहना है कि इस तकनीक से वन्यजीवों की समय रहते पहचान हो सकेगी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों की भी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।


