पर्वतीय शहरों में जाम से निजात दिलाएंगी ऑटोमेटेड पार्किंग
दस जिलों में 63 परियोजनाएं पूरी, 4202 वाहनों के लिए विकसित हुई पार्किंग क्षमता

देहरादून। पहाड़ों में बढ़ते पर्यटन और चारधाम यात्रा के दबाव के बीच सड़कों पर वाहनों की बढ़ती भीड़ से निपटने के लिए सरकार अब पार्किंग व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप दे रही है। सीमित भूमि वाले पर्वतीय शहरों में कम जगह पर अधिक वाहनों को खड़ा करने के लिए मल्टीलेवल और ऑटोमेटेड पार्किंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। आवास विभाग ने पिछले चार वर्षों में दस पर्वतीय जिलों में 63 पार्किंग परियोजनाएं पूरी कर 4202 वाहनों के लिए क्षमता विकसित की है।
इन परियोजनाओं में पारंपरिक सरफेस पार्किंग के साथ बहुमंजिला और ऑटोमेटेड पार्किंग भी शामिल हैं। सबसे अधिक 1087 वाहनों की क्षमता अल्मोड़ा में विकसित की गई है। नैनीताल में 679, चंपावत में 600, उत्तरकाशी में 477, पिथौरागढ़ में 309, रुद्रप्रयाग में 304, पौड़ी में 256, चमोली में 201, टिहरी में 163 और बागेश्वर में 126 वाहनों की पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
पर्यटन और तीर्थस्थलों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए कई बड़ी परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। नैनीताल के मेट्रोपोल होटल परिसर में करीब 700 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग निर्माणाधीन है। वहीं कैंची धाम में 500 से अधिक वाहनों की क्षमता वाली बहुमंजिला पार्किंग तैयार की जा रही है। इन परियोजनाओं से सड़क किनारे होने वाली अव्यवस्थित पार्किंग कम होने और जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
पार्किंग सुविधाओं पर विशेष जोर
सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में पार्किंग सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। 63 परियोजनाओं के पूरा होने से पर्वतीय जिलों में पार्किंग की समस्या काफी हद तक कम हुई है।
उत्तराखंड में पिछले वर्ष छह करोड़ से अधिक पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचे। इसे देखते हुए प्रमुख पर्यटन स्थलों और चारधाम यात्रा मार्गों पर यात्री सुविधाओं के विस्तार के साथ पार्किंग ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड



