उत्तराखंडराजनीति

अब लाल चौक पर शान से लहराता है तिरंगा : नितिन नवीन

पूर्व सैनिक सम्मेलन में भाजपा अध्यक्ष बोले, सैनिक का राष्ट्रप्रेम कभी रिटायर नहीं होता, सीमाओं पर मजबूत हुआ बुनियादी ढांचा

हल्द्वानी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के साहस और मजबूत नेतृत्व ने भारत के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। उन्होंने कहा कि एक समय कश्मीर के लाल चौक पर पाकिस्तान का झंडा देखकर भारतीयों का सिर शर्म से झुक जाता था, लेकिन आज उसी लाल चौक पर तिरंगा शान से लहरा रहा है। यह बदलाव देश की सुरक्षा नीति और सैनिकों के बढ़े मनोबल को दर्शाता है।

हल्द्वानी में आयोजित पूर्व सैनिक सम्मेलन में नितिन नवीन ने कहा कि सैनिक देश की सुरक्षा और स्वतंत्रता की आधारशिला हैं। सीमा पर विषम परिस्थितियों में सैनिकों के डटे रहने के कारण ही देश की जनता सुरक्षित जीवन जी रही है। उन्होंने कहा कि सैनिक भले ही सेवा से सेवानिवृत्त हो जाए, लेकिन उसका राष्ट्रप्रेम और देशसेवा का जज्बा कभी सेवानिवृत्त नहीं होता।

2011 की एकता यात्रा का सुनाया अनुभव

भाजपा अध्यक्ष ने अपने कश्मीर दौरे का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय एकता यात्रा के दौरान जब वह लाल चौक पहुंचे थे, तब वहां पाकिस्तान का झंडा देखकर उन्हें पीड़ा हुई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश के नेतृत्व और सोच में बदलाव आया। आज लाल चौक पर तिरंगा लहराता देखकर देश का हर नागरिक और सैनिक गर्व महसूस करता है।

सीमाओं तक पहुंची सड़क, बदली सोच

नितिन नवीन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में तवांग के बोमला सीमा क्षेत्र का दौरा करने के दौरान उन्होंने वहां सड़कों की खराब स्थिति देखी थी। इसके बाद सीमावर्ती क्षेत्रों तक सड़क संपर्क मजबूत करने पर तेजी से काम हुआ। उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों को अब देश के ‘अंतिम गांव’ के बजाय ‘प्रथम गांव’ मानने की सोच विकसित हुई है।

रेजांग ला के वीरों को किया नमन

भाजपा अध्यक्ष ने कुमाऊं रेजीमेंट के ध्येय वाक्य ‘पराक्रमो विजयते’ का उल्लेख करते हुए रेजांग ला के वीर मेजर शैतान सिंह और 13 कुमाऊं के जवानों को नमन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीर सैनिकों की भूमि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उत्तराखंड को ‘पंचम धाम’ कहे जाने को उन्होंने प्रदेश के सैन्य योगदान के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यह सैनिकों और सैन्य परिवारों के योगदान की पहचान है।

नितिन नवीन ने पूर्व सैनिकों के लिए लागू वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) को भी महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों और पूर्व सैनिकों के सम्मान के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

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