उत्तराखंड

चम्पावत से सीमांत विकास को नई दिशा, बनबसा-टनकपुर के लिए चार बड़ी घोषणाएं

पट्टों के विनियमितीकरण से लेकर धार्मिक पर्यटन, तकनीकी शिक्षा और पक्के आवास तक पर जोर; मुख्यमंत्री धामी बोले- अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा विकास का लाभ

देहरादून। राज्य के चहुंमुखी और संतुलित विकास की दिशा में सीमांत क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर सरकार का जोर है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बनबसा में क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़ी चार महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें पट्टे की भूमि के विनियमितीकरण, प्राचीन मंदिरों के सौंदर्यीकरण, इंजीनियरिंग कालेज के विस्तार और जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के फैसले शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ शिक्षा, पर्यटन और आवास के क्षेत्र में विकास को गति देना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने श्रेणी-1 ‘ख’ तथा तराई-भाबर स्टेट के पट्टों की भूमि के पट्टेदारों के विनियमितीकरण की कार्यवाही शीघ्र करने की घोषणा की। शारदा और कैनाल कॉरिडोर के अंतर्गत बनबसा-टनकपुर के प्राचीन एवं पौराणिक मंदिरों का सौंदर्यीकरण और विस्तारीकरण भी किया जाएगा। इससे धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय इंजीनियरिंग कालेज, टनकपुर के विस्तार के लिए 2.01 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। वहीं बनबसा और टनकपुर नगर निकाय क्षेत्रों में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत सरकारी भूमि पर कच्चे और अस्थायी मकानों में रह रहे परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और सीमांत क्षेत्रों का समग्र, संतुलित व चहुंमुखी विकास सुनिश्चित करना है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button