उत्तराखंड

ब्लैक होल के पास एक्स-रे की रहस्यमयी चमक का खुला राज

एरीज के वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सिमुलेशन से खोजा उतार-चढ़ाव का संभावित कारण, ब्लैक होल की घूर्णन गति और पदार्थ के प्रवाह के बीच संबंध भी आया सामने

नैनीताल। ब्लैक होल को ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमयी खगोलीय संरचनाओं में गिना जाता है। इसका गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश भी इसकी पकड़ से बाहर नहीं निकल सकता। इसके बावजूद ब्लैक होल के आसपास का क्षेत्र अत्यधिक ऊर्जा और विकिरण का स्रोत होता है। खासतौर पर इससे निकलने वाली एक्स-रे चमक का कभी तेज होना तो कभी मंद पड़ना लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ है। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सिमुलेशन के माध्यम से इस रहस्य को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

वैज्ञानिक सनित देबनाथ और डॉ. इंद्रनील चट्टोपाध्याय के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में एक्स-रे की चमक में होने वाले नियमित अंतराल के उतार-चढ़ाव के पीछे पदार्थ के प्रवाह में पैदा होने वाली अस्थिरता को संभावित कारण बताया गया है। शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित शोध पत्रिका जर्नल ऑफ हाई एनर्जी एस्ट्रोफिजिक्स में प्रकाशित हुए हैं। यह अध्ययन ब्लैक होल के आसपास होने वाली अत्यधिक ऊर्जा वाली प्रक्रियाओं को समझने में नई वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराता है।

क्या है एक्स-रे की चमक में उतार-चढ़ाव की वजह

ब्लैक होल के आसपास मौजूद गैस और अन्य पदार्थ उसके प्रबल गुरुत्वाकर्षण के कारण तेजी से उसकी ओर खिंचते हैं। इस दौरान वे ब्लैक होल के चारों ओर घूमते हुए चक्र जैसी संरचना बनाते हैं, जिसे एक्रिशन डिस्क कहा जाता है। इस डिस्क में पदार्थ के आपसी घर्षण और अत्यधिक गर्म होने से बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। इसी ऊर्जा का एक हिस्सा एक्स-रे विकिरण के रूप में दिखाई देता है।

वैज्ञानिकों ने एक्स-रे की चमक में लगभग नियमित अंतराल पर होने वाले बदलावों का अध्ययन किया। खगोल विज्ञान में इन्हें अर्ध-आवधिक दोलन (क्वासी-पिरियोडिक ऑसिलेशन) कहा जाता है। ये बदलाव एक सेकंड में कई बार तक हो सकते हैं। इनकी आवृत्ति और गति का विश्लेषण कर वैज्ञानिक ब्लैक होल के आसपास पदार्थ की गतिविधियों और वहां की भौतिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी हासिल करते हैं।

घर्षण की एक सीमा पार होते ही अस्थिर होने लगता है प्रवाह

एरीज के न्यूमेरिकल एंड थियोरेटिकल एस्ट्रोफिजिक्स समूह की ओर से विकसित कंप्यूटर सिमुलेशन में सामने आया कि पदार्थ के प्रवाह में आंतरिक घर्षण यानी चिपचिपाहट एक निश्चित सीमा से अधिक होने पर उसमें बनने वाला शॉक अस्थिर होकर दोलन करने लगता है। पदार्थ के प्रवाह में पैदा होने वाली यही हलचल एक्स-रे की चमक में नियमित उतार-चढ़ाव का कारण बन सकती है।

अध्ययन में ब्लैक होल की घूर्णन गति की भूमिका भी सामने आई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, धीमी गति से घूमने वाले ब्लैक होल में यह शॉक उससे अपेक्षाकृत दूर रह सकता है, जबकि तेजी से घूमने वाले ब्लैक होल में यह उसके अधिक करीब पहुंच सकता है। इस बदलाव से एक्स-रे दोलनों की आवृत्ति प्रभावित होती है और उसमें वृद्धि हो सकती है। इस तरह अध्ययन एक ही भौतिक प्रक्रिया के माध्यम से कम और अधिक आवृत्ति वाले एक्स-रे उतार-चढ़ाव को समझने का आधार देता है।

ब्लैक होल के ऊर्जा तंत्र को समझने में मिलेगी मदद

इस शोध के निष्कर्षों से वैज्ञानिक एक्स-रे संकेतों का विश्लेषण कर ब्लैक होल के आसपास पदार्थ की गति, उसकी घूर्णन गति के प्रभाव और ऊर्जा के प्रवाह को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इससे अंतरिक्ष दूरबीनों से प्राप्त आंकड़ों की व्याख्या करने और ब्लैक होल के अधिक सटीक सैद्धांतिक मॉडल विकसित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, यह अध्ययन कंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित है। इसके निष्कर्षों को वास्तविक खगोलीय अवलोकनों से मिलाकर आगे परखना होगा। इसके बावजूद यह शोध ब्रह्मांड के उन जटिल रहस्यों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण, पदार्थ की गति और ऊर्जा का व्यवहार एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।

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