12 किमी तक कंधों पर उठाकर लाए छह शव, रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घुप्प अंधेरे और दुर्गम पहाड़ी रास्तों से जूझती रहीं बचाव टीमें; सुबह पौने पांच बजे जोशीमठ पहुंचा अंतिम पार्थिव शरीर, एम्स ऋषिकेश में लिए गए डीएनए सैंपल

ज्योतिर्मठ (चमोली)। हेलीकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले छह लोगों के पार्थिव शरीरों को निकालने के लिए बचाव दलों को पूरी रात दुर्गम पहाड़ों में संघर्ष करना पड़ा। घुप्प अंधेरा, खड़ी चढ़ाई और उबड़खाबड़ रास्ते अभियान की सबसे बड़ी चुनौती बने। हालात ऐसे थे कि आधुनिक संसाधनों के बावजूद बचाव कर्मियों को शवों को कंधों पर उठाकर करीब 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। सेना, आइटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने आखिरकार सभी छह पार्थिव शरीर सुरक्षित बाहर निकाल लिए।
जिलाधिकारी गौरव कुमार के अनुसार, दुर्घटनास्थल बेहद दुर्गम और ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में था। वहां तक सड़क संपर्क नहीं होने के कारण रेस्क्यू टीमों ने पांडुकेश्वर की ओर से पैदल चढ़ाई शुरू की। देर शाम टीमें घटनास्थल तक पहुंचीं और शवों को निकालने का अभियान शुरू किया। इसके बाद अंधेरे और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच एक-एक कर सभी शवों को नीचे लाया गया।
पूरी रात चले अभियान के बाद रविवार सुबह करीब 4:45 बजे अंतिम पार्थिव शरीर जोशीमठ पहुंचाया गया। इसके बाद सभी छह शव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योतिर्मठ लाए गए, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं।
डीएनए जांच से होगी पहचान
इसके बाद एनटीपीसी हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के जरिए सभी पार्थिव शरीर एम्स ऋषिकेश भेजे गए। हादसे में शवों के क्षत-विक्षत होने के कारण उनकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में एम्स में डीएनए सैंपल एकत्र किए गए हैं। इनका मिलान परिजनों के डीएनए नमूनों से कराया जाएगा। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पोस्टमार्टम कराकर पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपे जाएंगे।
अंधेरे में भी नहीं थमे जवानों के कदम
करीब 12 किलोमीटर तक शवों को कंधों पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना बचाव अभियान का सबसे कठिन हिस्सा रहा। लंबी दूरी, खतरनाक ढलान और रात का अंधेरा होने के बावजूद जवानों ने अभियान जारी रखा। विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से सभी छह पार्थिव शरीरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है।



