दीपावली पर वन्यजीव तस्करी रोकने को डिजिटल निगरानी तेज, उल्लुओं के ऑनलाइन कारोबार पर रहेगी नजर
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने जारी किए निर्देश, संदिग्ध पोस्ट और विज्ञापनों का होगा सत्यापन; संवेदनशील इलाकों में रात की गश्त बढ़ेगी

देहरादून। दीपावली के दौरान अंधविश्वास और कथित तांत्रिक गतिविधियों के नाम पर उल्लुओं के शिकार और तस्करी की आशंका को देखते हुए उत्तराखंड वन विभाग ने वन्यजीव अपराधों पर निगरानी तेज करने की तैयारी की है। अब सोशल मीडिया समेत अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त, शिकार और अवैध कब्जे से जुड़ी संदिग्ध पोस्ट व विज्ञापनों पर नजर रखी जाएगी। ऐसी सामग्री सामने आने पर पहले उसका सत्यापन किया जाएगा और मामला सही पाए जाने पर पुलिस व अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। विभाग का जोर ऑनलाइन माध्यमों के साथ-साथ वन्यजीवों के अवैध शिकार, परिवहन और व्यापार से जुड़ी गतिविधियों पर समय रहते अंकुश लगाने पर है। इसके लिए प्रदेश के वन प्रभागों और संरक्षित क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों तथा पूर्व में सामने आई घटनाओं के आधार पर संवेदनशील स्थान चिह्नित किए जाएंगे।
ऑनलाइन विज्ञापनों से बाजारों तक निगरानी
दीपावली के दौरान उल्लुओं को लेकर प्रचलित अंधविश्वास के चलते इनके अवैध शिकार और व्यापार की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिक्री, अवैध कब्जे और शिकार से संबंधित पोस्ट व विज्ञापनों की जांच की जाएगी। संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि होने पर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने ऑनलाइन निगरानी के साथ संवेदनशील मार्गों, बाजारों, मेलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि वन्यजीवों के अवैध परिवहन और कारोबार को रोका जा सके।
संवेदनशील क्षेत्रों में रात को गश्त
वन विभाग सभी वन प्रभागों और संरक्षित क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों, पूर्व की घटनाओं और प्राप्त सूचनाओं के आधार पर निगरानी की रणनीति बनाएगा। उल्लुओं सहित अन्य निशाचर वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार रात में सघन गश्त की जाएगी। फंदे या जाल लगाकर वन्यजीवों को पकड़ने अथवा अवैध रूप से रखने की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस और एसओजी के साथ संयुक्त कार्रवाई
वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए स्थानीय पुलिस, एसओजी, विशेष बाघ सुरक्षा बल (एसटीएफ) और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक वन प्रभाग और संरक्षित क्षेत्र में नोडल अधिकारी नामित कर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
अवैध शिकार, कब्जे, परिवहन और व्यापार के मामलों में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि वन्यजीवों के अवैध कारोबार से जुड़ी कोई गतिविधि ऑनलाइन या ऑफलाइन सामने आने पर तत्काल विभाग अथवा पुलिस को सूचना दें।



