उत्तराखंडवन-पर्यावरण

पीएम की ‘मन की बात’ में गूंजी टिहरी की हेंवल नदी, जल संरक्षण मॉडल को मिली राष्ट्रीय पहचान

26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चल रहा पुनर्जीवन अभियान, 126 जलस्रोत और 28 गदेरे किए गए पुनर्जीवित; जलधारा के साथ ग्रामीण आजीविका संवारने पर भी जोर

देहरादून। पहाड़ों में सूखते जलस्रोतों और घटती जलधाराओं के बीच टिहरी की हेंवल नदी ने उम्मीद की नई धारा बहाई है। जल संरक्षण की इस पहल की गूंज अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में हेंवल नदी पुनर्जीवन मॉडल का उल्लेख किया। इसके साथ ही टिहरी में जलग्रहण क्षेत्र को संवारने और प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने की यह पहल एक बार फिर चर्चा में आ गई है। करीब 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित इस अभियान में नदी को पुनर्जीवित करने के साथ मिट्टी में नमी बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत करने पर भी काम किया गया है।

126 जलस्रोत और 28 गदेरे किए पुनर्जीवित

हेंवल नदी पुनर्जीवन की पहल वर्ष 2018-19 में तत्कालीन नरेंद्रनगर वन प्रभाग में आईएफएस अधिकारी धर्म सिंह मीणा के नेतृत्व में शुरू हुई थी। अभियान के तहत 126 प्राकृतिक जलस्रोतों और 28 गदेरों को पुनर्जीवित करने का काम किया गया। इसके लिए वर्षाजल संचयन, चाल-खाल निर्माण, चेकडैम और पुनर्भरण गड्ढों जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाकर जलग्रहण क्षेत्र में हरियाली और नमी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

परियोजना के आकलनों के अनुसार, जिन क्षेत्रों का मूल्यांकन किया गया, वहां जलस्रोतों के प्रवाह में करीब 60 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। इस पहल में नदी की धारा को अलग से देखने के बजाय उसके पूरे जलग्रहण क्षेत्र को सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

जल संरक्षण से आजीविका तक की पहल

हेंवल नदी मॉडल में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी अहम स्थान दिया गया है। इसके तहत 34 हेंवल धारा संरक्षण समितियों के माध्यम से लोगों को जलस्रोतों की देखरेख और संरक्षण से जोड़ा गया। जल संरक्षण के साथ ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए डेयरी, मधुमक्खी पालन और पौधशाला जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया गया।

परियोजना के अनुसार, डेयरी गतिविधियों से 500 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। इस तरह पहल का उद्देश्य केवल जलस्रोतों में पानी बढ़ाना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर विकसित करना भी है।

धर्म सिंह मीणा को मिला इको-वॉरियर अवार्ड

हेंवल नदी पुनर्जीवन मॉडल के लिए आईएफएस अधिकारी धर्म सिंह मीणा को इको-वॉरियर अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। हेंवल नदी की पहल अब इस बात का उदाहरण बनकर सामने आई है कि स्थानीय भागीदारी, वर्षाजल संचयन और जलग्रहण क्षेत्र के समन्वित प्रबंधन से पहाड़ी इलाकों में जल संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

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