उत्तराखंड

माइनस सात डिग्री में दौड़े धावक, 15 हजार फीट पर हिमालय को दी चुनौती

आदि कैलास अल्ट्रा मैराथन 2.0 का आगाज, 13 राज्यों के 1100 से अधिक धावकों ने दिखाया दमखम; ‘नशे को ना, जिंदगी को हां’ का दिया संदेश

धारचूला। बर्फीली हवाएं, माइनस सात डिग्री तापमान और समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई। हिमालय की इन विषम परिस्थितियों के बीच शनिवार को धावकों ने अपने साहस, सहनशक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। आदि कैलास की पावन धरती ज्योलिंगकांग में आयोजित आदि कैलास अल्ट्रा मैराथन 2.0 में देश के 13 राज्यों से पहुंचे 1100 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया। कड़ाके की ठंड के बावजूद प्रतिभागियों का उत्साह देखते ही बना। ‘जय महाकाल’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच मैराथन का आगाज हुआ।

सुबह साढ़े पांच बजे से आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। सुबह 6:30 बजे प्रतिभागियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। इसके दस मिनट बाद मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी और आइटीबीपी के अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर धावकों को रवाना किया। दुर्गम पहाड़ी भूभाग और कम तापमान के बीच दौड़ पूरी करना प्रतिभागियों के लिए बड़ी चुनौती रहा।

65 साल के महिपाल ने भी भरी जोश की दौड़

मैराथन में गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के 65 वर्षीय महिपाल सिंह सबसे अधिक उम्र के धावक रहे। उनकी भागीदारी ने यह संदेश दिया कि फिटनेस और दृढ़ इच्छाशक्ति के लिए उम्र बाधा नहीं है। अत्यधिक ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन और कड़ाके की ठंड के बीच दौड़ना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद धावकों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया।

मेडिकल कैंप और गर्म पानी की व्यवस्था

ऊंचाई और मौसम से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए आयोजन स्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। आइटीबीपी, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात रहीं। धावकों की सहायता के लिए विभिन्न स्थानों पर मेडिकल कैंप लगाए गए और गर्म पानी की व्यवस्था की गई, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रतिभागियों को तत्काल सहायता मिल सके।

रोमांच के साथ नशामुक्ति और पर्यटन का संदेश

आदि कैलास अल्ट्रा मैराथन का उद्देश्य सीमांत क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को फिटनेस और नशामुक्त जीवनशैली के प्रति जागरूक करना भी है। प्रतिभागियों ने नशे से दूर रहने का संकल्प लिया। आयोजन के जरिए ‘नशे को ना, जिंदगी को हां’ और ‘से नो टू ड्रग्स’ का संदेश दिया गया। हिमालय की कठिन परिस्थितियों में आयोजित इस मैराथन ने साहस, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने की प्रेरणा दी।

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