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केदारनाथ रोपवे का लिडार व टोपोग्राफी सर्वे पूरा, जून 2026 तक फाइनल अलाइनमेंट की उम्मीद; मुख्य सचिव ने दिए कार्यों में तेजी के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड में धार्मिक और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चल रहे रोपवे प्रोजेक्ट्स को लेकर एक बड़ी खबर आई है। केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट का लिडार सर्वे, वीडियोग्राफी और टोपोग्राफी सर्वे का काम पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही कंसेशनियर द्वारा जियो-टेक्निकल जांच भी शुरू कर दी गई है, जिसमें गौरीकुंड और सोनप्रयाग स्टेशन के लिए जियो-टेक्निकल सर्वे को पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, रोपवे का शुरुआती अलाइनमेंट पूरा हो चुका है और जून 2026 तक फाइनल अलाइनमेंट होने की उम्मीद है। इसके अलावा, रियल साइज के कंटेनरों के साथ देहरादून से सोनप्रयाग तक लॉजिस्टिक्स का ड्राई रन भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जबकि हेमकुंट साहिब रोपवे के लिए जमीन का सर्वे फिलहाल गतिमान है।

​यह महत्वपूर्ण जानकारियां सोमवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित ‘उत्तराखण्ड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड’ के निदेशक मंडल की द्वितीय बैठक में सामने आईं। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने केदारनाथ और हेमकुंट साहिब रोपवे प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की और विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अपनी संस्तुति प्रदान की।

​फॉरेस्ट क्लीयरेंस और बुनियादी सुविधाओं पर रहेगा जोर

​मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि दोनों ही रोपवे प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत फॉरेस्ट लैंड क्लीयरेंस (वन भूमि स्वीकृति) के काम में तेजी लाई जाए। उन्होंने सभी आवश्यक सर्वे कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।

​मुख्य सचिव के प्रमुख निर्देश:

​यूटिलिटी शिफ्टिंग: बिजली और पानी की आपूर्ति से जुड़े कार्यों को जल्द से जल्द निपटाया जाए।
​मल्टीमोडल कनेक्टिविटी: रोपवे प्रोजेक्ट्स के तहत पार्किंग, लास्ट माइल कनेक्टिविटी (अंतिम छोर तक पहुंच) पर विशेष ध्यान दिया जाए।
​आर्थिक विकास: रोपवे स्टेशनों के आसपास व्यावसायिक क्षेत्र (कमर्शियल जोन) विकसित किए जाएं ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो सके।
​जन-संवाद: परियोजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी हितधारकों (Stakeholders) से लगातार बातचीत की जाए।

​हेमकुंट साहिब रोपवे की स्थिति

बैठक में नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड के अधिकारियों ने बताया कि हेमकुंट साहिब रोपवे के लिए भी जमीन का सर्वे का काम चल रहा है। हालांकि, ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में खराब मौसम की वजह से इसके ड्रोन सर्वे में कुछ देरी हुई है, लेकिन अब आखिरी हिस्से के लिए डीजीपीएस और लिडार सर्वे को दोबारा शुरू कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव के साथ सचिव दिलीप जावलकर, धीराज गर्ब्याल एवं एनएचएलएमएल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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