खेतों से कार्बन क्रेडिट तक… किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी
जलागम विभाग ने शुरू की फिजिबिलिटी स्टडी, छह माह में सामने आएगी रिपोर्ट, आठ जिलों की 519 ग्राम पंचायतों में छोड़ी गई कृषि भूमि का होगा चिन्हांकन

देहरादून।पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक छोड़ी गई कृषि भूमि को फिर से आय का जरिया बनाने की कवायद तेज हो गई है। जलागम विभाग अब किसानों को खेती और बागवानी के साथ कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय दिलाने की तैयारी में जुट गया है। इसके लिए विभाग ने कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में काम कर रही हैदराबाद की कंपनी कोर कार्बन एक्स के साथ एमओयू किया है। कंपनी अगले छह माह में फिजिबिलिटी स्टडी पूरी कर इसकी रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी।
यह पहल विश्व बैंक वित्त पोषित उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के तहत की जा रही है। परियोजना प्रदेश के आठ जिलों की 519 ग्राम पंचायतों में संचालित है। इसके तहत किसानों द्वारा छोड़ी गई कृषि योग्य भूमि को कृषि-औद्यानिकी मॉडल के माध्यम से फिर से उपयोग में लाने के साथ कार्बन क्रेडिट का लाभ किसानों तक पहुंचाने की योजना है।
पहले तलाशेंगे जमीन, फिर तय होगा मॉडल
फिजिबिलिटी स्टडी के दौरान परियोजना क्षेत्रों में ऐसी कृषि भूमि को चिन्हित किया जाएगा, जहां कार्बन क्रेडिट से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। इसके साथ ही इन गतिविधियों में भाग लेने के इच्छुक किसानों का भी ब्योरा जुटाया जाएगा।
कंपनी अध्ययन के आधार पर यह बताएगी कि चयनित क्षेत्रों में कार्बन क्रेडिट हासिल करने के लिए किन गतिविधियों को अपनाया जा सकता है। साथ ही कार्बन क्रेडिट के पंजीकरण के लिए जरूरी प्रोजेक्ट डेवलपमेंट डॉक्यूमेंट (पीडीडी) भी तैयार किया जाएगा।
आठ जिलों में होगा विस्तृत अध्ययन
फिजिबिलिटी स्टडी के दायरे में अल्मोड़ा, नैनीताल, ऊधमसिंहनगर, पौड़ी, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के चयनित परियोजना क्षेत्र आएंगे। जरूरत पड़ने पर इन क्षेत्रों से लगे आसपास के इलाकों को भी अध्ययन में शामिल किया जा सकेगा।
विभाग का मकसद कार्बन क्रेडिट के लिए जमीन और किसानों की उपलब्धता के साथ-साथ ऐसी गतिविधियों की पहचान करना है, जिनसे किसानों को लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिल सके।
उत्पादकता भी बढ़ेगी, आय का नया जरिया भी मिलेगा
कृषि-औद्यानिकी मॉडल के जरिये छोड़ी गई कृषि भूमि को दोबारा उत्पादन से जोड़ने पर जहां कृषि और बागवानी उत्पादों की पैदावार बढ़ने की उम्मीद है, वहीं कार्बन क्रेडिट किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बनेगा। विभाग इस मॉडल को सफल होने पर भविष्य में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना बना रहा है।
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“प्रदेश के किसानों के दीर्घकालिक लाभ के लिए कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। जलागम विभाग के माध्यम से तैयार इस प्रोजेक्ट को भविष्य में प्रदेश के अन्य स्थानों पर मॉडल के रूप में लागू किया जा सकेगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।” -दिलीप जावलकर, सचिव, जलागम
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