सीएम धामी के सख्त निर्देश: 15 दिन में दुरुस्त हों विकास प्राधिकरण क्षेत्र की सड़कें, 15 अक्टूबर तक पूरा हो सौंदर्यीकरण
हर लंबित मास्टर प्लान और परियोजना की तय होगी समय-सीमा, अधिकारियों की जवाबदेही होगी सुनिश्चित

-अवैध निर्माण पर रियल टाइम निगरानी के लिए हर प्राधिकरण में बनेगा मॉनिटरिंग डैशबोर्ड, जीआईएस-ड्रोन से होगी निगरानी
-शहरों में सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट होंगे अनिवार्य, अगली समीक्षा तक 70 प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री आवास में आवास विभाग के नियंत्रणाधीन सभी विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक योजना और परियोजना के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने के साथ संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जाए।
मुख्यमंत्री ने लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान और अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि इन कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर धरातल पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। प्रत्येक लंबित कार्य की वर्तमान स्थिति, पूरा होने की समय-सीमा और जिम्मेदार अधिकारी का स्पष्ट विवरण तैयार किया जाए।
15 अक्टूबर तक पूरा हो सौंदर्यीकरण
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में इसी माह से बड़े स्तर पर सौंदर्यीकरण कार्य शुरू किए जाएं और 15 अक्टूबर तक इन्हें पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि सौंदर्यीकरण कार्यों की गुणवत्ता और स्वरूप G20 समिट के दौरान किए गए कार्यों की तर्ज पर आकर्षक और प्रभावी होना चाहिए। बजट की कमी को कार्य में देरी का कारण नहीं माना जाएगा। जहां अतिरिक्त बजट की जरूरत हो, वहां उसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
15 दिन में दुरुस्त हों सभी सड़कें
मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण क्षेत्रों में खराब सड़कों को लेकर भी अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी सड़कों का सर्वे कर उनकी स्थिति का आकलन किया जाए और खराब सड़कों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों के भीतर विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाली सभी सड़कों को बेहतर स्थिति में लाया जाए। साथ ही सड़क सुधार कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाए।
PMAY के लाभार्थियों की 15 दिन में तैयार होगी सूची
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी जनपदों में योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों की विस्तृत सूची तैयार कर 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवास योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचना चाहिए और इसकी नियमित समीक्षा आवश्यक है।
सिटी पार्क के साथ अनिवार्य होंगे पिंक टॉयलेट
मुख्यमंत्री ने सभी शहरों में सिटी पार्क विकसित करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य टॉयलेट के साथ पिंक टॉयलेट की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवश्यकता के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएं।
अधिकारियों को अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत पूरा करने का निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाए।
अवैध निर्माण पर शुरू से होगी निगरानी
अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि निर्माण पूरा होने या विवाद बढ़ने का इंतजार न किया जाए। आधुनिक तकनीक के जरिए शुरुआती स्तर पर ही संदिग्ध निर्माण की पहचान की जाए।
इसके लिए GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि अवैध निर्माण के मामलों में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
हर प्राधिकरण में बनेगा Illegal Construction Monitoring Dashboard
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard विकसित करने के निर्देश दिए। इसमें संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक की पूरी प्रक्रिया की रियल टाइम स्थिति दर्ज होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति व्यवस्था होगी और प्रभावी
मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों से एकीकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भवन मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को भी Citizen Friendly बनाने के निर्देश दिए गए हैं। वेबसाइट पर योजनाओं, मानचित्र स्वीकृति, शुल्क, नियमों और अन्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराने को कहा गया। प्रस्तावित चैटबॉट की प्रगति की भी मुख्यमंत्री ने जानकारी ली।
देहरादून-हरिद्वार में पार्किंग समस्या का स्थायी समाधान
देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में पार्किंग की समस्या पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। पर्याप्त पार्किंग सुविधा से वंचित नगर निकायों को चिन्हित कर MDDA और HRDA को उनके साथ समन्वय स्थापित करने को कहा गया।
मल्टी-लेवल पार्किंग, सरफेस पार्किंग, पेरीफेरल पार्किंग और PPP मॉडल के माध्यम से पार्किंग विकसित करने की योजना तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए पार्किंग समस्या का अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान तलाशना होगा।
हर जिले में आवासीय परियोजनाओं की होगी नियमित मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में चल रही आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट विवरण तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें कितने आवास पूरे हो चुके हैं, कितने निर्माणाधीन हैं और परियोजनाएं किस चरण में हैं, इसका पूरा ब्यौरा शामिल होगा। जहां निर्माण कार्य की गति धीमी है, वहां आवश्यक कार्रवाई कर परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में जहां संभव हो, प्रक्रियाओं में एकरूपता
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास प्राधिकरणों में नक्शा स्वीकृति, अवैध निर्माण, विकास शुल्क, मास्टर प्लान और प्रवर्तन की अलग-अलग व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जहां संभव हो, प्रक्रियाओं में एकरूपता लाई जाए।
इसके लिए अधिकारियों को व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि नागरिकों को विकास प्राधिकरणों से जुड़ी सेवाएं सरल, स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से मिल सकें।
2-3 विकास क्षेत्रों में पायलट आधार पर लैंड पूलिंग
मुख्यमंत्री ने Land Pooling Scheme को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कम से कम 2 से 3 विकास क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लैंड पूलिंग योजना लागू करने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
योजना में किसानों और भूमि मालिकों को होने वाले लाभ का स्पष्ट और पारदर्शी मॉडल तैयार करने तथा उन्हें योजना की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं में भूमि मालिकों के हित और भविष्य के लाभ स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों पर भी रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों में भी नागरिक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।
स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय कर स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
देरी पर तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने बैठक के अंत में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी की कोई गुंजाइश नहीं है। प्रत्येक कार्य की समय-सीमा तय कर उसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। लापरवाही या अनावश्यक विलंब मिलने पर जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि जनता को विकास कार्यों का लाभ समय पर मिलना चाहिए। इसके लिए शासन से लेकर विभागीय स्तर तक प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।


