
देहरादून। उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को नई पहचान देने के लिए अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में माणा पास से औली तक ‘100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन’ आयोजित की जाएगी। करीब 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा पास से शुरू होने वाली यह दौड़ बदरीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली तक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को पिथौरागढ़ जिले के गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में प्रतिभाग करते हुए इसकी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय की दुर्गम परिस्थितियों के बीच होने वाले ऐसे आयोजन उत्तराखंड की साहसिक पर्यटन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेंगे। साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
दौड़ के साथ खुलेंगे पर्यटन के नए रास्ते
धामी ने कहा कि साहसिक खेलों और अल्ट्रा रन जैसे आयोजनों से सीमांत क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को नई पहचान मिलेगी। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होमस्टे, होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय गाइडों से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि पर्यटन गतिविधियों का विस्तार स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ पलायन रोकने में भी सहायक बने।
उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। पर्यटन और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर इन क्षेत्रों में आजीविका के नए विकल्प तैयार किए जा सकते हैं।
आदि कैलाश रन में धावकों का बढ़ाया उत्साह
गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में मुख्यमंत्री ने 70 और 42 किलोमीटर की दौड़ के विजेताओं को पुरस्कृत किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों से पहुंचे धावकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में कठिन रास्तों, प्रतिकूल मौसम और कम ऑक्सीजन के बीच दौड़ना साहस, संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति की परीक्षा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, आदि कैलाश रन के पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने भाग लिया था। इस वर्ष के आयोजन से भी क्षेत्र में साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को सामने लाने का अवसर मिला है। कार्यक्रम में उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष अशोक सिंह नबियाल, सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, भारतीय सेना, आइटीबीपी और एसएसबी के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य मौजूद रहे।



