देहरादून। मानसून के दौरान भूस्खलन, बाढ़ और सड़कें बंद होने जैसी परिस्थितियों के बीच भी आयुष स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सचिव, आयुष एवं आयुष शिक्षा रंजना राजगुरु ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भू-धंसाव या बाढ़ के खतरे वाले आयुष चिकित्सालयों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। वहीं, पर्वतीय और दूरस्थ अस्पतालों में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त अग्रिम भंडार भी रखा जाए, ताकि किसी मरीज को इलाज में परेशानी न हो।
शुक्रवार को आयोजित दो उच्चस्तरीय बैठकों में सचिव ने एक ओर मानसून और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की, तो दूसरी ओर आयुर्वेदिक शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता और नियामकीय व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों में संचालित अस्पतालों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। सचिव ने कहा कि जिन अस्पतालों पर भू-धंसाव, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा है, वहां बिना देरी के वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। यदि भवन सुरक्षित नहीं हैं तो चिकित्सालयों को अस्थायी रूप से सुरक्षित परिसरों में स्थानांतरित किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्षा से प्रभावित भवनों और रिटेनिंग वॉल की क्षति का तत्काल तकनीकी आकलन कर प्रस्ताव निदेशालय और जिलाधिकारियों को भेजें, ताकि मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए समय पर स्वीकृति मिल सके।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि मानसून के दौरान कई क्षेत्रों का संपर्क भूस्खलन के कारण टूट जाता है। ऐसे में दूरस्थ अस्पतालों में जीवनरक्षक और आवश्यक औषधियों का पर्याप्त स्टॉक पहले से उपलब्ध कराया जाए। सचिव ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मरीजों को दवा या उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि मानसून के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके बाद भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तराखंड के कुलसचिव और अधिकारियों के साथ हुई बैठक में आयुर्वेदिक एवं संबद्ध शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। सचिव ने बताया कि शासन ने संस्थानों के औचक निरीक्षण के लिए समिति गठित कर दी है। यह समिति समय-समय पर निरीक्षण करेगी और मानकों में कमी मिलने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शैक्षणिक अनुशासन मजबूत करने के लिए सभी संस्थानों में आधार लिंक्ड बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए। परिषद को संस्थानों का नियमित शैक्षणिक मार्गदर्शन करने और द्रव्यगुण, हर्बल गार्डन, रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना प्रयोगशालाओं तथा एनाटॉमी कक्षों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने को कहा गया।
विद्यार्थियों को बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिलाने के लिए आयुर्वेदिक अस्पतालों की ओपीडी, आईपीडी और पंचकर्म इकाइयों को और सुदृढ़ करने पर भी जोर दिया गया। संस्थानों को मासिक और त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट परिषद को भेजने, उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थानों की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ साझा करने और विद्यार्थियों की शिकायतों के निस्तारण के लिए ऑनलाइन ग्रीवांस पोर्टल को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए।

