महिला सशक्तीकरण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना सरकार का लक्ष्य : धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव में लिया भाग, सरकारी स्तर पर तीजोत्सव आयोजित करने का किया ऐलान

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और अधिकारों की दृष्टि से सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। महिला सशक्तीकरण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना सरकार का लक्ष्य है, ताकि वे परिवार के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर सकें। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि भविष्य में हरितालिका तीज उत्सव का आयोजन सरकारी स्तर पर किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रविवार को जसवंत सिंह ग्राउंड, गढ़ी कैंट में आयोजित गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
गोर्खाली समाज के योगदान को सराहा
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की विकास यात्रा में गोर्खाली समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वीरता, राष्ट्रभक्ति, निष्ठा और परिश्रम इस समाज की पहचान हैं। देश की सीमाओं की रक्षा में गोर्खा वीरों ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया है। शिक्षा, खेल, कला-साहित्य और समाजसेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों में गोर्खाली समाज ने प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि मसूरी विधानसभा क्षेत्र में अमर शहीद कप्तान दल बहादुर थापा की स्मृति में ‘आजाद हिंद फौज शहीद द्वार’ का शिलान्यास किया गया है। यह द्वार गोर्खा समाज के शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनेगा और भावी पीढ़ी को उनके बलिदान से परिचित कराने का कार्य करेगा।
संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरितालिका तीज माता पार्वती की तपस्या, आस्था, समर्पण और शक्ति का प्रतीक है। ऐसे पर्व महिलाओं की शक्ति और संकल्प को रेखांकित करने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि माताएं और बहनें भाषा, लोक परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी संरक्षक हैं। इसलिए अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है।
तीन लाख से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए राज्य में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। ये महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, आचार्य बालकृष्ण, गीता पुष्कर धामी, गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव कमेटी की अध्यक्ष प्रभा शाह, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, नेहा जोशी, सिद्धार्थ अग्रवाल और अनुकृति गुसाईं समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


