
देहरादून। शिक्षक केवल विद्यार्थी का जीवन संवारने वाला मार्गदर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्र का चरित्र गढ़ने वाला व्यक्तित्व होता है। शिक्षक बच्चों को ज्ञान देने के साथ उनमें संस्कार, आत्मविश्वास और जीवन की सही दिशा का भाव पैदा करता है। यह बात राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर लोक भवन में आयोजित शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार समारोह में कही।
राज्यपाल ने वर्ष 2025 के लिए चयनित 19 शिक्षक-शिक्षिकाओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया और उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इनमें प्रारंभिक शिक्षा के 12, माध्यमिक शिक्षा के छह और प्रशिक्षण संस्थान श्रेणी के एक शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता शिक्षिका मंजूबाला को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
अंक नहीं, विद्यार्थी की उड़ान है शिक्षक की असली सफलता
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि उसकी कक्षा के कितने विद्यार्थियों ने अच्छे अंक हासिल किए। शिक्षक की वास्तविक सफलता तब है, जब सामान्य परिवार का कोई बच्चा आगे बढ़कर देश की पहचान बने और यह कहे कि सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने का विश्वास उसे अपने गुरु से मिला।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानना, उसमें आत्मविश्वास जगाना और आगे बढ़ने का साहस देना शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। हजारों शिक्षकों के बीच चयनित होकर यह सम्मान हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
तकनीक के साथ शिक्षक की संवेदना जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने, प्रश्न करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है। भविष्य की शिक्षा में तकनीक और शिक्षक की संवेदना का बेहतर समन्वय जरूरी है। तकनीक सीखने के नए अवसर दे सकती है, लेकिन उनका सही दिशा में उपयोग सुनिश्चित करने का काम शिक्षक ही कर सकता है।
उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को आधुनिक ज्ञान के साथ अपनी जड़ों से जोड़ने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकसंस्कृति, पर्यावरण, परंपराएं और हिमालयी जीवन-पद्धति उत्तराखंड की अमूल्य विरासत हैं। आधुनिक शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का समन्वय बच्चों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील और संतुलित व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है।
विद्यालय ऐसा हो जहां बच्चे बेझिझक सवाल पूछें
राज्यपाल ने कहा कि विद्यालय ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां बच्चा भय से नहीं बल्कि उत्साह से आए। प्रश्न पूछना कमजोरी नहीं, बल्कि सीखने की शुरुआत माना जाना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें और उसे बड़े सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने का साहस भी मिले।
उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला, ज्ञान के साथ संस्कार, सफलता के साथ संवेदनशीलता और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का भाव भी सिखाएं। एक सच्चा शिक्षक विद्यार्थी को अज्ञान से ज्ञान और निराशा से आशा की ओर ले जाता है।
शैलेश मटियानी के साहित्य से जुड़ेंगे विद्यार्थी
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि करीब 70 हजार शिक्षकों में से 19 शिक्षकों का चयन चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। यह सम्मान शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कथाकार शैलेश मटियानी के नाम पर दिया जाता है। मटियानी ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विद्यालयी पुस्तकालयों में शैलेश मटियानी की प्रमुख कृतियां उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि विद्यार्थी उनके साहित्य से परिचित होने के साथ उत्तराखंड की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ सकें।
ये शिक्षक हुए सम्मानित
प्रारंभिक शिक्षा: विष्णुपाल सिंह नेगी (पौड़ी), लखपत सिंह रावत (चमोली), पृथ्वी सिंह रावत (उत्तरकाशी), वीरेंद्र सिंह रावत (देहरादून), रोबिन कुमार (हरिद्वार), महेश्वर प्रसाद सेमवाल (टिहरी), शशिकांत नौटियाल (रुद्रप्रयाग), जहीर अब्बास (चंपावत), नौ सिंह (ऊधमसिंह नगर), डॉ. श्वेता मजगांई (नैनीताल), विक्रम सिंह परिहार (पिथौरागढ़) और त्रिलोक सिंह अधिकारी (अल्मोड़ा)।
माध्यमिक शिक्षा: नरेंद्र सिंह नेगी (पौड़ी), डॉ. सुमन ध्यानी शर्मा (चमोली), डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव (देहरादून), कमलेश पंवार (हरिद्वार), नवीन चंद्र पंत (चंपावत) और विशन सिंह मेहता (नैनीताल)।
प्रशिक्षण संस्थान: डॉ. सुबोध सिंह बिष्ट (उत्तरकाशी)।
विशेष सम्मान: राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता मंजूबाला (चंपावत)।
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