आपदा प्रबंधनउत्तराखंड

सेंडई फ्रेमवर्क: अब आपदा से ‘लड़ना’ नहीं, ‘बचना’ होगी प्राथमिकता; विभागों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम

बिल्ड बैक बैटर: उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की नई रणनीति, सचिव विनोद कुमार सुमन ने दिए एक्शन प्लान के निर्देश

​देहरादून। उत्तराखंड में आपदाओं के कारण होने वाली जनहानि और आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए सरकार ने अब वैश्विक मानकों पर काम तेज कर दिया है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी निर्माण या पुनर्वास कार्य में ‘बिल्ड बैक बैटर’  की अवधारणा को कड़ाई से लागू किया जाएगा। बुधवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में सेंडई फ्रेमवर्क (2015-2030) की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी रेखीय विभागों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत ‘एक्शन प्लान’ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

सुरक्षा ऑडिट और जोखिम का वैज्ञानिक आकलन

सेंडई फ्रेमवर्क का मुख्य उद्देश्य आपदाओं से होने वाली मृत्यु दर और आर्थिक क्षति को न्यूनतम करना है। इसके लिए हर विभाग को अपनी परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना होगा। अब केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना काफी नहीं है, बल्कि आपदा आने से पहले ही जोखिम को समझना होगा। इसके लिए विभागों को सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य जैसे पहलुओं पर आपदा के प्रभाव का विश्लेषण कर व्यवस्थित आंकड़े जुटाने होंगे।

हर विभाग में बनेगा ‘आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ’
समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि अब राज्य के प्रत्येक विभाग में एक समर्पित ‘आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ’ स्थापित किया जाएगा। यह प्रकोष्ठ जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के साथ समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नामित करेगा। सचिव ने निर्देश दिए कि विकास की किसी भी नई परियोजना में ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण’ और ‘जलवायु परिवर्तन अनुकूलन’ को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

भवन मानकों में कोई ढिलाई नहीं
सेंडई फ्रेमवर्क की दूसरी और तीसरी प्राथमिकता के तहत तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर बल दिया गया। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण संहिता, भूमि उपयोग और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। सचिव ने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों जैसे स्कूल, अस्पताल और पुलों को सुरक्षित बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियां अपनाई जाएंगी।​

एक्शन प्लान के मुख्य बिंदु: क्या होगा खास

मैपिंग और वर्गीकरण: सभी विभागीय भवनों की GIS/GPS आधारित मैपिंग होगी। उन्हें सुरक्षित और असुरक्षित श्रेणियों में बांटा जाएगा।
​सुरक्षा ऑडिट: कमजोर पड़ चुकी सरकारी इमारतों का सेफ्टी ऑडिट कर उनका सुदृढ़ीकरण (Retrofitting) किया जाएगा।
​पूर्व चेतावनी प्रणाली: चेतावनी संदेशों को समयबद्ध तरीके से प्रसारित करने के लिए विभागों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा।
​जोनिंग: भूकंपीय माइक्रो-जोनिंग और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखकर ही भविष्य की योजनाएं बनेंगी।

सेंडई फ्रेमवर्क के चार स्तंभ
​आपदा जोखिम को समझना: आंकड़ों का संग्रह और वैज्ञानिक मूल्यांकन।
​प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण: संस्थागत ढांचे और नियमों को मजबूत करना।
​न्यूनीकरण में निवेश: विकास योजनाओं में सुरक्षा को प्राथमिकता।
​प्रभावी प्रतिक्रिया: बेहतर तैयारी और भविष्य के लिए सुरक्षित पुनर्निर्माण।

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