उत्तराखंडवन-पर्यावरण

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी में नियंत्रित रहेगी पर्यटकों की संख्या

देहरादून। चमोली जिले में विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क में पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। घाटी की पर्यटन वहन क्षमता का आकलन कर यह तय करने की तैयारी है कि संवेदनशील क्षेत्र में कितने पर्यटकों की आवाजाही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना संभव है। प्रमुख सचिव पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन आरके सुधांशु ने गुरुवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।

फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के प्रस्तावित ईको-सेंसेटिव जोन की समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव ने कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर योजना बनाई जाए। इसके लिए संबंधित जिलाधिकारी, पर्यटन विभाग और अन्य विभागों से रिपोर्ट प्राप्त की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ईको-सेंसेटिव जोन से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाएगा।

प्राकृतिक संपदा के संरक्षण पर जोर
फूलों की घाटी अपनी दुर्लभ वनस्पतियों, रंग-बिरंगे फूलों और जैव विविधता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव का आकलन करना महत्वपूर्ण है। पर्यटकों की वहन क्षमता निर्धारित करने से भविष्य में आवाजाही के प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, पर्यटकों की अधिकतम संख्या कितनी होगी, इस संबंध में अभी कोई आंकड़ा तय नहीं किया गया है।

स्थानीय हितों का भी रखा जाएगा ध्यान
प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने कहा कि ईको-सेंसेटिव जोन के प्रस्ताव तैयार करते समय पारिस्थितिकी संरक्षण और स्थानीय जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। बैठक में राजाजी नेशनल पार्क के प्रस्तावित ईको-सेंसेटिव जोन पर भी चर्चा हुई। बैठक में सचिव वन सी. रविशंकर, पीसीसीएफ (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल, सीसीएफ साकेत, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के निदेशक पंकज कुमार, डीएफओ केदारनाथ रजत सुमन, अपर सचिव अभिषेक रुहेला और अपर निदेशक पर्यटन पूनम चंद सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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