ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों पर धामी सरकार का मरहम, किसानों को मिलेगी दोगुनी राहत
आपदा राहत मानकों के बराबर अतिरिक्त सहायता देने के निर्देश, अक्टूबर से दिसंबर तक बिजली बिलों का भुगतान स्थगित, केसीसी ऋण पर राहत के लिए केंद्र को भेजा जाएगा पत्र

देहरादून। ओलावृष्टि की मार से फसलें गंवाने वाले किसानों को राहत पहुंचाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने आर्थिक सहायता का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित किसानों को निर्धारित आपदा राहत मानकों के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त उतनी ही राशि देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही किसानों को तत्काल आर्थिक दबाव से राहत देने के लिए अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के बिजली बिलों का भुगतान स्थगित रखने का फैसला किया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण की अदायगी तीन माह तक टालने के लिए केंद्र सरकार से भी अनुरोध किया जाएगा।
राज्य सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को दोबारा खेती-किसानी की गतिविधियां शुरू करने में मदद देना और फसल क्षति के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट को कम करना है। कृषि, औद्यानिकी और गन्ने की फसलों को हुए नुकसान के मद्देनजर अतिरिक्त सहायता देने के निर्देश जारी किए गए हैं। इससे प्रभावित किसानों को राहत राशि के साथ बिजली बिलों और ऋण भुगतान के मोर्चे पर भी राहत मिलने की उम्मीद है।
आपदा राहत के ऊपर मिलेगी समान राशि की अतिरिक्त मदद
ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए सरकार ने निर्धारित आपदा राहत मानकों के तहत मिलने वाली सहायता के बराबर अतिरिक्त राशि देने का निर्णय लिया है। यानी पात्र किसानों को तय मानकों के अनुसार मिलने वाली राहत के अतिरिक्त उतनी ही राशि और उपलब्ध कराई जाएगी।
यह सहायता कृषि, औद्यानिकी और गन्ने की फसलों को हुए नुकसान के लिए दी जाएगी। फसल बर्बाद होने से किसानों को न केवल मौजूदा उत्पादन का नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि अगली फसल की तैयारी, बीज, खाद और अन्य कृषि निवेशों के लिए भी पूंजी की जरूरत होती है। ऐसे में अतिरिक्त सहायता से किसानों को इस आर्थिक दबाव से उबरने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसानों को मिलने वाली वास्तविक राशि फसल क्षति के आकलन, पात्रता और निर्धारित राहत मानकों के अनुरूप तय होगी।
तीन महीने बिजली बिलों की चिंता से मिलेगी राहत
फसल नुकसान के बीच किसानों पर बिजली बिलों का बोझ कम करने के लिए अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के विद्युत बिलों का भुगतान स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है। इससे प्रभावित किसानों को तीन महीने तक तत्काल बिल भुगतान से राहत मिलेगी और वे उपलब्ध धनराशि का इस्तेमाल खेती तथा घरेलू जरूरतों को पूरा करने में कर सकेंगे।
खेती में सिंचाई, कृषि उपकरणों के संचालन और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बिजली महत्वपूर्ण है। फसल क्षति के कारण आमदनी प्रभावित होने पर बिजली बिलों का भुगतान भी किसानों के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में भुगतान स्थगित करने का फैसला उनकी तात्कालिक नकदी संबंधी परेशानी को कम करने की दिशा में अहम कदम है।
केसीसी ऋण चुकाने के लिए मिलेगा अतिरिक्त समय
राज्य सरकार ने किसानों को कर्ज अदायगी में राहत दिलाने के लिए भी पहल की है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण की अदायगी तीन माह तक स्थगित करने का अनुरोध भारत सरकार के वित्त मंत्रालय से किया जाएगा। इसके लिए केंद्र को पत्र भेजा जाएगा।
केसीसी के माध्यम से किसान फसल उत्पादन और कृषि संबंधी जरूरतों के लिए ऋण लेते हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण फसल खराब होने पर अपेक्षित आमदनी नहीं हो पाती, जिससे ऋण की किस्त या बकाया चुकाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में तीन महीने की मोहलत मिलने से प्रभावित किसानों को अपनी आर्थिक स्थिति संभालने का अतिरिक्त समय मिल सकता है। हालांकि, केसीसी ऋण की अदायगी स्थगित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। इस संबंध में अंतिम निर्णय केंद्र स्तर पर होने वाली कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
कृषि और बागवानी क्षेत्र को संभालने पर जोर
ओलावृष्टि का असर केवल खेतों में उगाई जाने वाली फसलों तक सीमित नहीं रहता। कृषि के साथ फल उत्पादन और औद्यानिकी गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। इससे किसानों की मौजूदा आमदनी के साथ आगामी कृषि चक्र की तैयारियों पर भी असर पड़ता है। गन्ने की फसल को हुए नुकसान को भी सरकार की अतिरिक्त सहायता के दायरे में शामिल किया गया है।
ऐसे में राहत राशि, बिजली बिलों के भुगतान में स्थगन और ऋण अदायगी के लिए अतिरिक्त समय की पहल को किसानों की तात्कालिक और आगामी जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है। इन उपायों का लाभ जमीन पर किस हद तक पहुंचेगा, यह पात्र किसानों की पहचान, नुकसान के आकलन और संबंधित विभागों की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
किसानों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे : धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न कठिनाइयों से उन्हें उबारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए हरसंभव कदम उठाने की बात कही।
सरकार का जोर प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहारा देने के साथ उनकी कृषि गतिविधियों को जारी रखने में मदद करने पर है। अतिरिक्त सहायता और बिजली बिलों के भुगतान में स्थगन से जहां तत्काल वित्तीय दबाव कम करने की कोशिश की गई है, वहीं केसीसी ऋण पर राहत के लिए केंद्र से अनुरोध करने की पहल की जा रही है।


