उत्तराखंडपर्यटन

पहाड़ की पगडंडियां अब बताएंगी सही रास्ता

100 ट्रेकिंग रूट्स की होगी जीपीएस-जीआईएस मैपिंग, सीएम धामी ने टीमों को दिखाई हरी झंडी, पहले चरण में 35 रूट्स का सर्वे; 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ट्रेक नवंबर से पहले होंगे मैप

देहरादून। हिमालय की दुर्गम पगडंडियों पर ट्रेकिंग का रोमांच अब तकनीक के साथ कदमताल करेगा। उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रदेश के 100 प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स की जीपीएस और जीआईएस मैपिंग का अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से मैपिंग टीमों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

अभियान के पहले चरण में 35 ट्रेकिंग रूट्स का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले हाई एल्टीट्यूड ट्रेक्स को प्राथमिकता दी गई है। इन रूट्स का सर्वेक्षण नवंबर में बर्फबारी शुरू होने से पहले पूरा करने का लक्ष्य है।

रूट से लेकर कैंपसाइट तक दर्ज होगी हर जानकारी

मैपिंग के दौरान ट्रेकिंग रूट की सटीक दूरी और ऊंचाई के साथ प्रमुख पड़ाव, कैंपसाइट, टॉयलेट और अन्य उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी। इससे प्रत्येक ट्रेक का विस्तृत डेटाबेस तैयार होगा, जो पर्यटकों को यात्रा की योजना बनाने और प्रशासन को रूट्स के बेहतर प्रबंधन में मदद करेगा।

अभियान में जीपीएस व जीआईएस विशेषज्ञों के साथ ट्रैकिंग विशेषज्ञ, ट्रैक लीडर्स, कंटेंट राइटर्स और ऐप डेवलपर्स शामिल हैं। यानी मैपिंग के साथ ही रूट से जुड़ी जानकारी को पर्यटकों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की तैयारी है।

नेटवर्क नहीं होगा तो भी रास्ता बताएगा ऐप

हिमालयी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या को देखते हुए परियोजना के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन जीपीएस नेविगेशन ऐप विकसित किया जाएगा। नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने पर भी ऐप काम करेगा। ट्रेकर निर्धारित मार्ग से भटकता है तो ऐप उसे सही रास्ते पर वापस लाने के लिए रीरूटिंग की सुविधा देगा।

दुर्गम क्षेत्रों में रास्ता भटकने की स्थिति में यह सुविधा ट्रेकर्स के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि वास्तविक परिस्थितियों में इसकी प्रभावशीलता मैपिंग की सटीकता, डिवाइस के जीपीएस और अन्य तकनीकी सीमाओं पर भी निर्भर करेगी।

कम चर्चित ट्रेक्स को मिलेगा डिजिटल प्लेटफार्म

जीपीएस-जीआईएस मैपिंग के बाद दूरस्थ और कम चर्चित ट्रेकिंग स्थलों को भी डिजिटल पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। पर्यटकों को किसी रूट पर जाने से पहले उसकी दूरी, ऊंचाई, पड़ाव और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी एक ही प्लेटफार्म पर मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान साहसिक एवं ट्रेकिंग पर्यटन से जुड़ी रही है। आधुनिक तकनीक से ट्रेकिंग रूट्स को जोड़ने से राज्य को सुरक्षित, तकनीक-सक्षम और टिकाऊ ट्रेकिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के अनुसार, वन विभाग के सहयोग से तैयार होने वाला डिजिटल डेटाबेस ट्रेकिंग रूट्स और सुविधाओं की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा। इससे ट्रेकिंग की फीजिबिलिटी, सुरक्षा और टिकाऊ प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। 100 रूट्स की मैपिंग पूरी होने के बाद उत्तराखंड के ट्रेकिंग पर्यटन को पहली बार एक व्यापक डिजिटल नेटवर्क मिलने की उम्मीद है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button