एक सप्ताह में ही बह गया चीन सीमा को जोड़ने वाला बेली ब्रिज
कुलागाड़ नाले में रात को आया सैलाब, लिपुलेख समेत दर्जनों सीमांत गांवों का संपर्क कटा; 15 सितंबर से प्रस्तावित आदि कैलाश यात्रा पर भी संकट

धारचूला। चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले के सीमांत क्षेत्र में कुलागाड़ नाले का उफान एक बार फिर भारी पड़ा। रविवार रात करीब 10 बजे अचानक आए तेज सैलाब में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से महज एक सप्ताह पहले तैयार किया गया नया बेली ब्रिज बह गया। पुल के बहने से लिपुलेख, तवाघाट, चौदांस, दारमा, जुम्मा, खेला और पांग्ला समेत दर्जनों सीमांत गांवों का धारचूला से सड़क संपर्क टूट गया है।
कुलागाड़ नाले में रात को अचानक पानी का बहाव बढ़ा। तेज गड़गड़ाहट के साथ बोल्डर और मलबा बहकर आने लगा। कुछ ही देर में सैलाब ने नए पुल को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों के अनुसार पुल के साथ पुराने पुल का मलबा भी बह गया। मौके पर लोहे के गार्डर तक नजर नहीं आ रहे हैं। घटना के बाद सीमांत क्षेत्र में आवागमन को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बीआरओ ने पांच सितंबर को ही लंबे प्रयासों के बाद इस बेली ब्रिज को तैयार कर यातायात बहाल किया था। महज सात दिन में पुल के बह जाने से निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीण धर्म सिंह धामी, जोगा सिंह, महेश वर्मा, पवन सिंह धामी और नंदन सिंह धामी के अनुसार वर्ष 2013 से अब तक कुलागाड़ में छह पुल आपदा की भेंट चढ़ चुके हैं।
आदि कैलाश यात्रा पर भी संकट
15 सितंबर से आदि कैलाश यात्रा का दूसरा चरण प्रस्तावित है। ऐसे में पुल टूटने से प्रशासन और बीआरओ की चुनौती बढ़ गई है। एसडीएम धारचूला ने बीआरओ और एसएचजी से पुष्टि के बाद पुल बहने की जानकारी दी। राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजकर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। ग्रामीणों के बीच कुलागाड़ बूबू देवता को लेकर धार्मिक मान्यता भी है, हालांकि पुलों के बार-बार बहने के वास्तविक कारणों के लिए तकनीकी जांच जरूरी मानी जा रही है।



