
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन भी जरूरी है। केवल किताबी ज्ञान से विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। परिवार और विद्यालय के सामूहिक प्रयासों से ही बच्चों में अच्छे जीवन-मूल्य, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास की भावना विकसित की जा सकती है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की।
धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर भी विशेष जोर दे रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ अभिभावकों को उनके लिए पर्याप्त समय भी देना चाहिए। विद्यार्थियों को हर परिस्थिति में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पांडेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक और आर्यन देव उनियाल मौजूद रहे।
शिक्षक राष्ट्र के भविष्य का निर्माता : धामी
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। वह बच्चों को सही दृष्टि, आत्मविश्वास, संस्कार और जीवन की दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी है। एक शिक्षक सिर्फ विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा देने और उनकी क्षमताओं को निखारने की भी है।
शिक्षा व्यक्ति और राष्ट्र के विकास का आधार : निशंक
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. कुसुम कांता को भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाजसेवा के प्रति उनका गहरा लगाव था। शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कारों को भी हमेशा प्राथमिकता दी। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा एवं समाजहित में किए जा रहे कार्य ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हैं।
डॉ. निशंक ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र के निर्माण का आधार है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्रहित में करें। साथ ही उन्होंने कुसुम कांता फाउंडेशन और मंथन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

