उत्तराखंड के मंडुए का कर्नाटक में जलवा, कम बारिश में भी बंपर पैदावार
अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों की VL मंडुआ 400 किस्म बनी किसानों की पसंद, 100 दिन से कम में तैयार होती है फसल

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के पहाड़ों में विकसित मंडुआ अब दक्षिण भारत के किसानों के खेतों में भी अपनी पहचान बना रहा है। अल्मोड़ा स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) की विकसित VL मंडुआ 400 किस्म ने कर्नाटक में कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों के बीच बेहतर प्रदर्शन कर किसानों का भरोसा जीता है। कम समय में पकने, अच्छी उपज और कैल्शियम की भरपूर मात्रा जैसी खूबियों के चलते यह किस्म किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है।
राष्ट्रीय बीज निगम, दावणगेरे के अनुसार, खरीफ सीजन में कर्नाटक के करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र में इस किस्म का बीज उत्पादन किया गया। इसमें किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े 92 लघु एवं सीमांत किसानों ने भागीदारी की। किसानों के बीच इसकी मांग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सामान्य बिक्री के माध्यम से करीब 500 क्विंटल और डीलरों के जरिये 150 क्विंटल बीज की बिक्री हुई। कम बारिश के बावजूद फसल के प्रदर्शन से किसान संतुष्ट हैं।
संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के अनुसार, इस किस्म की कम अवधि, अच्छी उत्पादन क्षमता और पोषण संबंधी विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। किसानों को इसके प्रदर्शन से रूबरू कराने के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ने कर्नाटक के विजयनगर जिले के उज्जैनी गांव में किसान क्षेत्र दिवस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।
100 दिन से पहले तैयार, सूखे का जोखिम होगा कम
VL मंडुआ 400 की सबसे बड़ी खासियत है कि यह 100 दिन से भी कम समय में पककर तैयार हो जाती है। इसकी बालियां सघन हैं और उपज क्षमता भी अच्छी है। कम अवधि में फसल तैयार होने से वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों को मौसम के अंतिम चरण में बारिश की कमी से होने वाले नुकसान का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है। ऐसे में कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए यह किस्म उपयोगी साबित हो सकती है।
मानक किस्म से 11.5 प्रतिशत अधिक उपज
अखिल भारतीय समन्वित लघु धान्य अनुसंधान परियोजना के तहत देश के 40 स्थानों पर हुए परीक्षणों में VL मंडुआ 400 की औसत उपज 34.77 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वहीं, मानक किस्म VL मंडुआ 376 की औसत उपज 31.11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही। इस प्रकार नई किस्म ने 11.5 प्रतिशत अधिक औसत उपज दी।
कैल्शियम का भी बेहतर स्रोत
यह किस्म पोषण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसके 100 ग्राम दानों में 399.5 मिलीग्राम कैल्शियम पाया गया है। इससे मंडुआ की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में भी योगदान दे सकती है। उत्तराखंड में विकसित इस किस्म का कर्नाटक में बढ़ता प्रसार पर्वतीय कृषि अनुसंधान की उपयोगिता और मोटे अनाज की बढ़ती संभावनाओं को रेखांकित करता है।



