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ऐतिहासिक रहेगा पांच फरवरी से प्रारंभ होने वाला उत्तराखंड विधानसभा का सत्र, समान नागरिक संहिता और राज्य आंदोलनकारियों के लिए क्षैतिज आरक्षण संबंधी विधेयक पेश करेगी सरकार

विधानसभा सचिवालय ने सत्र की तैयारियों को दिया अंतिम रूप, आठ फरवरी तक प्रस्तावित है यह सत्र

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का विस्तारित सत्र पांच फरवरी सोमवार से प्रारंभ होने जा रहा है। विधानसभा के पिछले वर्ष सितंबर में हुए मानसून सत्र का सत्रावसान न होने के चलते इसे अब विस्तार दिया गया है। यद्यपि, सरकार ने इस सत्र में राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने और राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को सरकारी सेवाओं में क्षैतिज आरक्षण देने संबंधी विधेयक पारित कराने का निश्चय किया है। इससे यह सत्र न केवल विशेष बल्कि ऐतिहासिक भी होने जा रहा है।

समान नागरिक संहिता लागू करने के दृष्टिगत विशेषज्ञ समिति इसका ड्राफ्ट सरकार को सौप चुकी है। इसका परीक्षण चल रहा है। सरकार ने विधानसभा के इसी सत्र में इससे संबंधित विधेयक पेश कर इसे पारित कराने की ठानी है। ऐसी पहल करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी। यानी, राज्य में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान कानून होंगे। चाहे वह किसी भी धर्म, जाति का हो। सरकार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी नजीर बनेगी।

राज्य आंदोलनकारियों के लिए क्षैतिज आरक्षण का विषय भी लंबे समय से अटका है। हालांकि, मानसून सत्र में इससे संबंधित विधेयक पेश किया गया था, लेकिन तब सर्वसम्मति से इसे विधानसभा की प्रवर समिति को सौंप दिया गया था। प्रवर समिति अपनी रिपोर्ट विधानसभा को सौंप चुकी है। यह विधेयक भी इसी सत्र में पारित होगा। इसे राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद राज्य में सरकारी सेवाओं में राज्य आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिल सकेगा।

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