
देहरादून। जंगलों से घास ढोने की मशक्कत से ग्रामीण महिलाओं को राहत देने और किसानों की मक्का उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने वाली मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने साइलेज फेडरेशन को अगले एक वर्ष में 100 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर हासिल करने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने रविवार को देहरादून के अजबपुर में फेडरेशन के नवनिर्मित कार्यालय का शुभारंभ करते हुए साइलेज उत्पादन और वितरण व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।
डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा रही है। योजना के तहत मक्का उत्पादक किसानों को बाजार मिल रहा है, जबकि पशुपालकों को पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं के श्रम और समय की बचत भी हो रही है।
3.50 करोड़ से शुरू हुआ कारोबार, टर्नओवर 50 करोड़ पार
सहकारिता मंत्री ने बताया कि साइलेज फेडरेशन ने वर्ष 2019 में उत्तराखंड सहकारी विकास परियोजना (यूकेसीडीपी) से मिले 3.50 करोड़ रुपये के ऋण से कारोबार शुरू किया था। शुरुआत में 375 मक्का उत्पादक किसानों और एम-पैक्स के सहयोग से शुरू हुई यह पहल अब विस्तार ले चुकी है। वर्तमान में फेडरेशन का वार्षिक टर्नओवर 50 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। किसानों को अब तक 15 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि योजना से 2500 से अधिक किसान और 10 हजार से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। करीब 200 एम-पैक्स के माध्यम से पशुपालकों तक साइलेज पहुंचाया जा रहा है। वितरण में सहयोग देने वाली सहकारी समितियों को 2.70 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है।
टीएमआर यूनिट से मिलेगा संतुलित पशु आहार
डॉ. रावत ने कहा कि पशुओं को संतुलित और गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराने के लिए टीएमआर (टोटल मिक्स्ड राशन) यूनिट स्थापित की गई है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा। इससे हरे चारे की कमी दूर करने और पशुओं के पोषण में सुधार लाने में मदद मिलेगी। इसका लाभ दुग्ध उत्पादन और दूध की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य के प्रमुख मक्का उत्पादक जिलों को फेडरेशन से जोड़कर किसानों के लिए बाजार का विस्तार किया जाएगा। सरकार पशुपालकों को अब तक 80 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दे चुकी है। कार्यक्रम में फेडरेशन अध्यक्ष हर्षुल वर्मा, प्रबंध निदेशक मोनिका चुनेरा समेत अन्य अधिकारी और निदेशक मौजूद रहे।



