धराली आपदा: मलबे में दबे कल्पकेदार मंदिर को बचाने के लिए ग्रामीणों ने संभाली कमान
नवरात्र में पूजा-अर्चना के बाद खुदाई शुरू, एक्सकेवेटर से रोज आठ घंटे चलेगा काम; प्रतिदिन 40 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान

उत्तरकाशी। आपदा के मलबे में दबी धराली की धार्मिक विरासत को फिर से संवारने की उम्मीद जगी है। पिछले वर्ष की विनाशकारी बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए प्राचीन कल्पकेदार मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। रविवार को शारदीय नवरात्र के पहले दिन आराध्य सोमेश्वर देवता की डोली की मौजूदगी में विधिवत पूजा-अर्चना और भूमि पूजन के बाद मंदिर परिसर में खुदाई का काम शुरू कर दिया गया। शासन स्तर पर पहल का इंतजार लंबा होने के बाद ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से मंदिर को बचाने की मुहिम शुरू की है।
बाढ़ ने उजाड़ दिया था मंदिर परिसर
पिछले वर्ष पांच अगस्त को खीर गंगा में आई विनाशकारी बाढ़ ने धराली में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ के साथ आए मलबे ने प्राचीन कल्पकेदार मंदिर के गर्भगृह और परिसर को अपनी चपेट में ले लिया था। इस आपदा में मंदिर का ऊपरी गुंबद भी ध्वस्त हो गया था। धराली की धार्मिक पहचान से जुड़े इस प्राचीन मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे। मंदिर स्थानीय लोगों की आजीविका से भी जुड़ा रहा है। ऐसे में मंदिर को दोबारा सामने लाने की कोशिश ग्रामीणों के लिए आस्था के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने का अभियान भी है।
सरकारी आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने उठाया कदम
प्राचीन कल्पकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार और सचिव संजय पंवार के मुताबिक, प्रदेश सरकार की ओर से मंदिर को मलबे से बाहर निकालने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने खुद ही खुदाई कराने का फैसला लिया।
मंदिर समिति और ग्रामीणों ने आपदा की पहली बरसी यानी पांच अगस्त को अपने आराध्य सोमेश्वर देवता से खुदाई शुरू करने की अनुमति मांगी थी। ग्रामीणों के अनुसार, देवता की अनुमति मिलने के बाद नवरात्र में कार्य शुरू करने का निर्णय लिया गया। रविवार को धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद एक्सकेवेटर मशीन से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया।
रोजाना 40 हजार रुपये आएगा खर्च
कल्पकेदार मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए एक्सकेवेटर मशीन प्रतिदिन करीब आठ घंटे संचालित की जाएगी। इस काम पर रोजाना लगभग 40 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। खुदाई के दौरान मंदिर परिसर में जमा मलबे को हटाकर दबे हुए हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, मंदिर को पूरी तरह बाहर निकालने में कितना समय लगेगा, यह खुदाई के दौरान सामने आने वाली परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
धार्मिक विरासत बचाने की सामूहिक पहल
खुदाई शुरू होने के दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारी, ग्राम प्रधान, ग्रामीण, महिला मंगल दल और कीर्तन मंडली के सदस्य मौजूद रहे। ग्रामीणों की इस पहल से आपदा में क्षतिग्रस्त हुए कल्पकेदार मंदिर के अस्तित्व को बचाने की उम्मीद बढ़ी है। अब सभी की निगाहें खुदाई के दौरान मंदिर के दबे हुए हिस्सों के सामने आने और धराली की इस प्राचीन धार्मिक धरोहर को फिर से स्थापित करने की दिशा में होने वाली प्रगति पर टिकी हैं।


