2047 तक 28 लाख करोड़ की होगी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था
विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ में प्रति व्यक्ति आय 20 लाख रुपये करने का लक्ष्य; बेरोजगारी 3.5 और बहुआयामी गरीबी 0.61 प्रतिशत तक लाने की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के लिए सरकार ने महत्वाकांक्षी आर्थिक खाका तैयार किया है। इसके तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मौजूदा 3.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर करीब 28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, प्रति व्यक्ति आय को लगभग 20 लाख रुपये करने की योजना है। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ दस्तावेज जारी किया। इसमें करीब 440 संकेतकों के आधार पर प्रदेश के दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय की गई है।
विजन दस्तावेज में आर्थिक विकास के साथ आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने वर्ष 2047 तक बेरोजगारी दर घटाकर 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। बहुआयामी गरीबी में आय के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को भी शामिल किया जाता है। यानी विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की योजना है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार, प्रशासन और जनता के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड विकसित राज्य बनेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
22 हजार मेगावाट होगी ऊर्जा क्षमता
प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि विजन में कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2047 तक प्रदेश की स्थापित ऊर्जा क्षमता बढ़ाकर करीब 22 हजार मेगावाट करने और वन आच्छादन 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
अलग-अलग समयसीमा में तय होंगे लक्ष्य
विकास की रणनीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। संबंधित विभागों को इनके अनुरूप कार्ययोजनाएं तैयार करनी होंगी। समय-समय पर प्रगति की समीक्षा कर लक्ष्यों की प्राप्ति का आकलन भी किया जाएगा।
हर परिवार को मिलेगी देवभूमि आईडी
विजन के तहत देवभूमि परिवार पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक परिवार का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। पंजीकरण के बाद परिवार को विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी मिलेगी। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान और उन्हें सुविधाओं का लाभ पहुंचाना आसान होगा। नागरिकों को बार-बार दस्तावेज जमा करने और विभिन्न विभागों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही योजनाओं की निगरानी और बजट नियोजन में भी यह व्यवस्था मददगार होगी।


