
नैनीताल। सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक चमकीले क्यों दिखाई देते हैं। दशकों से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बने इस सवाल को सुलझाने की दिशा में भारतीय शोधकर्ताओं ने महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) के सहयोग से किए गए अध्ययन में सूर्य के ध्रुवों की चमक और वहां मौजूद चुंबकीय क्षेत्र के बीच मजबूत संबंध सामने आया है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि सूर्य के ध्रुवों के पास स्थित कोरोनल छिद्रों के आकार में बदलाव का संबंध भी इस चमक से है। इन निष्कर्षों से सूर्य के बाहरी वातावरण और सोलर विंड की उत्पत्ति को समझने में मदद मिल सकती है।
30 साल के आंकड़ों का किया विश्लेषण
इस अध्ययन में उदयपुर सौर वेधशाला, भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, आइआइटी रुड़की और दिल्ली के वैज्ञानिक भी शामिल रहे। शोधकर्ताओं ने जापान के नोबेयामा रेडियो हेलियोग्राफ से प्राप्त लगभग 30 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। यह उपकरण 17 गीगाहर्ट्ज आवृत्ति पर सूर्य से निकलने वाली रेडियो तरंगों का अध्ययन करता है।
अध्ययन के निष्कर्षों की तुलना नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी से प्राप्त सूर्य की तस्वीरों और विलकॉक्स सोलर ऑब्जर्वेटरी के चुंबकीय क्षेत्र संबंधी आंकड़ों से भी की गई। अलग-अलग स्रोतों से मिले आंकड़ों के विश्लेषण से सूर्य के ध्रुवीय क्षेत्रों की गतिविधियों और उनकी चमक के बीच संबंध समझने में मदद मिली।
चुंबकीय क्षेत्र और कोरोनल छिद्रों की अहम भूमिका
शोध का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ शोध फेलो रोहन बोस के अनुसार, अध्ययन में सूर्य के ध्रुवों पर चमक और चुंबकीय क्षेत्र की ताकत के बीच मजबूत संबंध पाया गया। साथ ही, ध्रुवों के निकट कोरोनल छिद्रों के आकार में होने वाले बदलाव भी चमक से जुड़े मिले।
कोरोनल छिद्र सूर्य के बाहरी वातावरण यानी कोरोना के अपेक्षाकृत कम घनत्व वाले क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों से सौर पवन के आवेशित कण तेजी से अंतरिक्ष में निकल सकते हैं। ऐसे में इनकी गतिविधियों को समझना सूर्य से निकलने वाली कण धाराओं के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
पृथ्वी के अंतरिक्षीय वातावरण को समझने में मिलेगी मदद
सूर्य से लगातार आवेशित कणों की धारा अंतरिक्ष में निकलती रहती है, जिसे सोलर विंड कहा जाता है। यह पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्षीय वातावरण को प्रभावित करती है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि सूर्य के ध्रुवों पर चुंबकीय गतिविधियों और चमक के संबंध को समझने से सोलर विंड की प्रक्रिया तथा उसके प्रभावों का बेहतर अध्ययन किया जा सकेगा।



