शिक्षा में संस्कार और नैतिक मूल्यों का समावेश जरूरी : धामी
दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता समारोह में 63 मेधावी विद्यार्थियों और छह प्रधानाचार्यों को किया सम्मानित

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों, राष्ट्रप्रेम, अनुशासन व सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना भी है। आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अच्छे संस्कारों का समावेश ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार है।
गुरुवार को मुख्यमंत्री मुख्य सेवक सदन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में प्रदेश की शीर्ष 10 मेरिट सूची में स्थान पाने वाले 63 विद्यार्थियों तथा उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले छह विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया। सम्मानित विद्यार्थियों में हाईस्कूल के 38 और इंटरमीडिएट के 25 छात्र-छात्राएं शामिल रहे।
हाईस्कूल में अक्षत गोपाल ने 98.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। वहीं, इंटरमीडिएट में गीतिका पंत और सुशीला मेहंदीरत्ता ने 98 प्रतिशत अंकों के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियां उनकी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम हैं। इस सफलता में शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग की भी अहम भूमिका रहती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में प्रदेश का हाईस्कूल परीक्षाफल 92.10 प्रतिशत और इंटरमीडिएट का 85.11 प्रतिशत रहा।
500 स्कूलों में वर्चुअल क्लासरूम
धामी ने कहा कि उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए गए हैं। दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। नंदा गौरा योजना के तहत पात्र छात्राओं को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
पूर्ण साक्षर राज्य बनना बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना गौरव की बात है। अब डिजिटल, वित्तीय और स्वास्थ्य संबंधी साक्षरता के साथ जीवनोपयोगी कौशल को बढ़ावा देना जरूरी है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का माध्यम भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों और अनुशासन को अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक सविता कपूर, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।



