धामी कैबिनेट के फैसले: हल्द्वानी में बनेगा हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स, पशुपालकों को बड़ा तोहफा, श्रमिकों-युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत
हाईकोर्ट के लिए 30 हेक्टेयर भूमि मंजूर, सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी सब्सिडी, मजदूरी संहिता-2026 लागू, खेल विश्वविद्यालय के लिए 122 पदों को स्वीकृति

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनकल्याण, रोजगार, शिक्षा, श्रमिक हित, न्यायिक आधारभूत ढांचे, पर्यटन और औद्योगिक विकास से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगी। कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी महानिदेशक सूचना एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने प्रेस ब्रीफिंग में दी। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में प्रस्तावित हाईकोर्ट कॉम्प्लेक्स को लेकर लिया गया। कैबिनेट ने 73 हेक्टेयर उपलब्ध वन भूमि में से आवश्यकता के अनुसार करीब 30 हेक्टेयर भूमि उच्च न्यायालय परिसर के निर्माण के लिए हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने गौ पालन योजना का दायरा बढ़ाते हुए सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी इसमें शामिल कर लिया है। अब लाभार्थी गाय के साथ-साथ भैंस भी खरीद सकेंगे। पशु की यूनिट लागत 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि पहले ही वर्ष में करीब 2,128 पशुपालक इस योजना से लाभान्वित होंगे।
श्रमिकों के हित में भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखण्ड मजदूरी संहिता नियमावली-2026 को मंजूरी दी। इसके तहत न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, प्रत्येक माह की सात तारीख तक वेतन, डिजिटल भुगतान और समान कार्य के लिए महिला एवं पुरुष को समान वेतन सुनिश्चित किया जाएगा।
समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों के लिए नई संचालन नियमावली लागू की गई है, जिससे अनुसूचित जाति एवं जनजाति के मेधावी छात्र-छात्राओं को बेहतर आवास, भोजन और शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की संरचना में भी बदलाव किया गया है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल कर पर्यावरण संरक्षण, जड़ी-बूटी प्रबंधन, कूड़ा नियंत्रण और स्थानीय समुदायों के बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया जाएगा।
राज्य की कर व्यवस्था को राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप बनाए रखने के लिए उत्तराखण्ड जीएसटी अधिनियम-2017 में संशोधन अध्यादेश लाने का भी निर्णय लिया गया।
खेल प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए गौलापार (हल्द्वानी) स्थित उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के संचालन हेतु 122 नियमित पदों के सृजन के साथ तकनीकी एवं सहायक स्टाफ की आउटसोर्स व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई।
दिनेशपुर और शक्तिफार्म क्षेत्र के बंगाली मूल के अनुसूचित जाति समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए सहायता कोष संचालन समिति में उसी समुदाय से उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के नामांकन का निर्णय लिया गया।
सहकारी समिति नियमावली में संशोधन कर कुष्ठ रोग से जुड़े भेदभावपूर्ण प्रावधान हटाए जाएंगे तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नए प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
ग्रामीण पेयजल योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित हस्तांतरण प्रोटोकॉल को राज्य में लागू करने का भी फैसला लिया गया।
वन विकास निगम में स्केलर पदों की भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए 100 अंकों की लिखित परीक्षा का प्रावधान किया गया है।
परिवहन और औद्योगिक विकास की दिशा में भी बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के बीच गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तारित करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने को मंजूरी दी गई। इससे धार्मिक पर्यटन, निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इसके अलावा औद्योगिक संबंध संहिता-2020 के तहत उत्तराखण्ड औद्योगिक संबंध नियमावली-2026 को भी मंजूरी दी गई, जिसमें औद्योगिक विवादों के समयबद्ध समाधान, ट्रेड यूनियनों की मान्यता, शिकायत निवारण समितियों का गठन, हड़ताल और तालाबंदी की स्पष्ट प्रक्रिया तथा श्रमिकों के लिए री-स्किलिंग फंड जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
कैबिनेट के इन फैसलों से राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उसका फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार सृजन, श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा, शिक्षा एवं खेल के विकास, न्यायिक और आधारभूत ढांचे के विस्तार तथा समावेशी विकास को नई गति देने पर है।


